श्रद्धालु सुबह से ही आश्रम में पहुंचना शुरू हो गए थे। हर ओर उत्साह का माहौल नजर आ रहा था। भक्तों की आँखों में आस्था झलक रही थी और वे माता के दिव्य रूप को निहारते हुए उनके आशीर्वाद की कामना कर रहे थे। पंचमेवा के श्रृंगार में मां के आभूषण और वस्त्रों की सजावट इतनी मनमोहक थी कि हर भक्त मंत्रमुग्ध हो गया। विशेष रूप से काजू, किशमिश, बादाम, अंजीर और पिस्ता से बने गहनों और वस्त्रों ने मां के रूप को और भी दिव्य और मोहक बना दिया।
मान्यता है कि राजराजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी की साधना से भक्तों को भोग और मोक्ष दोनों का फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि नवरात्र के इन दिनों श्रद्धालु विशेष रूप से इस स्थान की ओर आकर्षित होते हैं। आश्रम में लगी भव्य सजावट और मां के पंचमेवा श्रृंगार को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। हर कदम पर भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का अनुभव किया जा सकता है।
श्रीवनम आश्रम की पहाड़ियों पर यह दृश्य अत्यंत मनोहारी था। मां के श्रृंगार के चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों की सजावट और दीपों की रौशनी ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। श्रद्धालु न केवल मां के दर्शन कर रहे थे बल्कि पंचमेवा श्रृंगार की अद्भुत कला और सजीवता की सराहना भी कर रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस दिव्य अनुभव में लीन थे।
भक्तों का कहना था कि इस पंचमेवा श्रृंगार ने न केवल मां के रूप को अद्भुत बना दिया बल्कि उनके मन को भी शांति और आनंद से भर दिया। यह अनुभव उन्हें जीवनभर याद रहेगा। इस अवसर पर आश्रम के महंत और पुजारी ने भी मां को विशेष भोग अर्पित किया और पंचमेवा के आभूषणों का महत्व समझाते हुए श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया।
पूरे परिसर में भक्ति का माहौल देखने लायक था। मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाहरी हिस्सों तक हर जगह श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह की चमक दिखाई दे रही थी। पंचमेवा के श्रृंगार के दर्शन करने वाले श्रद्धालु अपने हाथ जोड़कर मां के चरणों में शीश झुकाते और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। यही नवरात्र की असली भक्ति और आनंद की अनुभूति है।
आस्था और भक्ति की इस अनूठी परंपरा ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के दिलों को भी छू लिया। पंचमेवा श्रृंगार के माध्यम से मां त्रिपुर सुंदरी का दिव्य रूप भक्तों के सामने उतारा गया और उन्होंने इस अवसर को जीवन का अद्भुत अनुभव माना।
