शिवपुरी। इंदौर के भागीरथपुरा (Indore Bhagirathpura) में दूषित पानी (Contaminated Water) से मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) से दूषित पानी पीने से एक युवक के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप (Handpump) के दूषित पानी से एक युवक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद विभाग की लापरवाही देखिए, जब ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना दी, तो विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन समाधान के बजाय हैंडपंप पर केवल “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखकर लौट गया।
इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।
