पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश की वन संपदा बहुत समृद्ध है और बावजूद इसके गलत चित्र का चयन किया गया, जिससे वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन के स्तर पर चिंता है। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि प्रशासन इतना निरंकुश हो गया है कि उसे यह भी पता नहीं कि सरकारी प्रकाशनों में क्या छाप रहा है। वहीं, कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने इसे हास्यास्पद बताते हुए कहा कि भारत में शेर, चीते और अन्य वन्य जीव हैं, जिनकी फोटो कैलेंडर में लगाई जा सकती थी।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस केवल नकारात्मक राजनीति कर रही है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने भी ट्वीट किया कि कांग्रेस और दिग्विजय सिंह भ्रम फैलाने की आदत छोड़ें।
इस विवाद ने सरकार के सरकारी प्रकाशनों की विश्वसनीयता और चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और भविष्य में चित्र चयन की प्रक्रिया में बदलाव करती है या नहीं।
