जबलपुर । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कटनी में भाजपा नेता नीलू रजक की हत्या के आरोपित अकरम खान के घर को गिराने पर 15 दिन के लिए रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने यह निर्णय उस समय लिया जब याचिका दाखिल करने वाले इमरान खान अकरम खान के भाई ने अदालत से यह अनुरोध किया कि उनके मकान को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 15 दिन की अवधि तय की है जिसके दौरान अगर कोई अन्य कानूनी अड़चन नहीं होती तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।
मामला क्या है
यह मामला भाजपा नेता नीलू रजक की हत्या से जुड़ा हुआ है जिसे 28 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में कटनी पुलिस ने अकरम खान और नेल्सन जोसेफ को गिरफ्तार किया था। हत्या के बाद, प्रशासन ने आरोपित के घर को गिराने के लिए नोटिस जारी किया था क्योंकि उनके पास मकान के वैध दस्तावेज नहीं थे। इस नोटिस को इमरान खान ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इमरान खान ने बताया कि उनके पास मकान के कुछ दस्तावेज हैं लेकिन यह दस्तावेज़ पूरी तरह से वैध नहीं हैं। उनके पास सिर्फ एग्रीमेंट के दस्तावेज हैं जो यह साबित नहीं करते कि वे उस संपत्ति के वास्तविक मालिक हैं। इसके बावजूद कैमोर नगर परिषद ने उस संपत्ति को गिराने के लिए नोटिस जारी किया था।
हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि इमरान खान के पास मकान के मालिकाना हक और निर्माण की अनुमति से संबंधित वैध दस्तावेज़ नहीं हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से उचित है। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के पास कानूनी दस्तावेज नहीं हैं तो उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत बुलडोज़र कार्रवाई पर 15 दिनों के लिए रोक लगाई गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर इस अवधि में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती तो प्रशासन नोटिस के अनुसार कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होगा।
आगे की प्रक्रिया
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील उत्कर्ष अग्रवाल ने एकलपीठ के आदेश के खिलाफ युगलपीठ में अपील करने की तैयारी शुरू कर दी है। वे चाहते हैं कि इस मामले में और अधिक कानूनी व्याख्या की जाए और एकलपीठ का आदेश रद्द किया जाए। इस फैसले ने कई सवालों को जन्म दिया है खासकर उन मामलों में जहां आरोपितों के खिलाफ बुलडोज़र कार्रवाई की जा रही है लेकिन उनके पास वैध दस्तावेज़ नहीं होते। ऐसे मामलों में कोर्ट का यह निर्णय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि ऐसी कार्रवाई से पहले आरोपी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाए। इस फैसले में भी इस दिशा निर्देश का पालन करते हुए 15 दिन की राहत दी गई है। अब देखना यह होगा कि युगलपीठ में इस फैसले को लेकर क्या परिणाम सामने आते हैं और क्या प्रशासन को मकान गिराने की अनुमति मिलती है या नहीं। इस बीच इस फैसले के बाद राज्य सरकार के द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह और पैनल अधिवक्ता आकाश मालपाणी ने अपने पक्ष को अदालत में रखा था और यह बताया था कि इमरान खान के पास जो दस्तावेज हैं वे केवल एग्रीमेंट के रूप में हैं जो पूरी तरह से वैध नहीं माने जा सकते।
इस फैसले ने स्पष्ट किया है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी व्यक्ति के घर को तोड़ा नहीं जा सकता। अगर कोई व्यक्ति घर के वैध दस्तावेज़ के बिना रहता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कानून का उल्लंघन नहीं हो। 15 दिन की रोक के बाद प्रशासन को अगर कोई कानूनी अड़चन नहीं मिलती तो वे तय किए गए आदेश के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि यदि किसी के पास सही दस्तावेज़ नहीं हैं, तो वह किस प्रकार कानूनी चक्कर में फंस सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक कानूनी बारीकियों को देखा जा सकता है।
