भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि काशी विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन का मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। इस आयोजन ने निर्यात सहयोग, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को नई दी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सम्मेलन के बाद वाराणसी में मीडिया से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मुख्यतः एक जिला-एक उत्पाद, जीआई टैग उत्पादों, निर्यात योग्य उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय विशेषताओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर केंद्रित रहा। दोनों राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को प्रोत्साहन देते हुए उनके ब्रांडिंग, विपणन एवं निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। औद्योगिक सहयोग, निवेश संवर्धन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विचार-विमर्श हुआ।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों ने परस्पर समन्वय और सहयोग से समृद्धि और विकास की दिशा में लंबी छलांग लगाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सम्मेलन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार माना तथा उत्तर प्रदेश के मंत्रीद्वय नंद गोपाल गुप्ता “नंदी” तथा राकेश सचान को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का दोनों राज्यों से अटूट संबंध है। भगवान श्रीराम ने अवतार के बाद जहां वनवास का लंबा समय मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में गुजारा। भगवान भी मथुरा के बाद श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर धार्मिक आस्था के कई केन्द्र विद्यमान हैं। धार्मिक आस्था की इस समानता को देखते हुए दोनों राज्यों के बीच धार्मिक सर्किट विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
विभिन्न औद्योगिक संगठनों एवं व्यापारिक संस्थाओं की रही सहभागिता
उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य ओडीओपी, जीआई टैग, शिल्प, कृषि एवं फूड उत्पादकों, उद्योग जगत, निवेशकों, शिल्पकारों एवं नीति-निर्माताओं को एक वृहद एवं साझा मंच प्रदान करना था। कार्यक्रम में कुल लगभग 400 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की व्यापक सहभागिता ने कार्यक्रम को संवाद, सहयोग एवं अनुभवों की साझेदारी का एक सशक्त एवं प्रभावी मंच बनाया।
सम्मेलन में कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का मिला अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा विशुद्ध रूप से ओडीओपी उत्पादों के एक्सचेंज और आपसी सीख (Exchange & Learning Platform) के लिए अभिकल्पित किया गया था, जहां दोनों राज्यों के कारीगरों, उद्यमियों और निर्यातकों को प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। कार्यक्रम ओडीओपी एक्सचेंज आधारित प्रदर्शनी, राज्यों के बीच सहयोग, साझा ब्रांडिंग, संयुक्त निर्यात और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा।
महत्वपूर्ण एमओयू हुए हस्ताक्षरित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सम्मेलन में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। पहला एमओयू श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं श्री महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति के मध्य हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत वाराणसी और उज्जैन में हुए विकास कार्यों से दोनों स्थानों पर धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप दोनों शहरों की अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है। इन समानताओं को देखते हुए बाबा विश्वनाथ और महाकाल मंदिर के प्रबंधन से संबंधित अनुभवों को साझा करने के उद्देश्य से यह एमओयू किया गया है। दूसरा एमओयू वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की पहल को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा अंतर्राज्यीय सहयोग के माध्यम से आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया।
विशेष प्रदर्शनी का आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि सम्मेलन में ओडीओपी उत्पादों पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश के 14 और उत्तर प्रदेश के 07 जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में दोनों राज्यों के प्रदर्शकों द्वारा हस्तशिल्प, वस्त्र, खाय उत्पाद, जीआई टैग उत्पाद एवं अन्य स्थानीय विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में दो समानांतर सत्रों का आयोजन भी किया गया। जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप सम्मेलन में मध्य प्रदेश के चंदेरी एवं महेश्वरी ब्रांड के कारीगरों ने उत्तर प्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ प्रत्यक्ष संवाद किया। पारंपरिक बुनकरी तकनीकों, डिज़ाइन नवाचारों साझा ब्रांडिंग रणनीतियों और संयुक्त खरीदार पहुंच, उन्नत पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों एवं निर्यात-उन्मुख उत्पाद विकास पर विचार-विमर्श किया गया। दूसरा समानांतर सत्र टूरिज्म राउंड टेबल सम्मेलन रहा। इसमें उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश के पर्यटन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख दूर ऑपरेटर्स तथा आईआरसीटीसी के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। यह पहल दोनों राज्यों में धार्मिक पर्यटन को संगठित करने, पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को सशक्त करने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हुई।
काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग और विक्रमादित्य शोध संस्थान का प्रयास है कि सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से जुड़े विविध पहलु तथा उनका विराट व्यक्तित्व पूरे देश के लोगों के सामने आए। इस उद्देश्य से काशी विश्वनाथ धाम में महानाट्य विक्रमादित्य का 3, 4 और 5 अप्रैल को मंचन किया जा रहा है। इस नाट्य से विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, दयालुता, सुशासन और लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी आस्था बेहतर तरीके से सबके सामने आएगी। नाटक में हाथी, घोड़े, ऊंट और पालकी शामिल होंगी। इस नाटक में 300 से 400 कलाकार सम्राट विक्रमादित्य के तत्कालीन समय को जीवंत करेंगे। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार का पूर्ण सहयोग हमें प्राप्त हो रहा है।
दोनों राज्य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना दोनों राज्यों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक गतिविधियों को जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त रूप से कार्य करने की ओर अग्रसर हैं।
सम्मेलन सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन दोनों राज्यों के लिए विकास और सांस्कृतिक समन्वय का एक प्रभावशाली मंच बना। इस सम्मेलन ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आपसी सहयोग को सुदृढ़ किया। इस पहल ने निवेश आकर्षण, रोजगार के नए अवसरों के सृजन, पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण, निर्यात संवर्धन और पर्यटन विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश क्षेत्रीय संतुलित विकास को सशक्त करते हुए आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित करने की ओर अग्रसर होंगे।
महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का निरीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी स्थित बीएलडब्ल्यू मैदान पहुँचकर आगामी 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित होने वाले भव्य महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ की तैयारियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, मंच सज्जा और दर्शकों की सुविधाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। न्याय और शौर्य के प्रतीक महाराजा विक्रमादित्य के कालजयी इतिहास को जीवंत करने वाला यह आयोजन न केवल कला का उत्कृष्ट संगम है, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत के पुनरुद्धार का एक सशक्त माध्यम भी है।
