अधिसूचना के अनुसार 21 विभागों के लिए कुल 155 पदों पर भर्ती होनी है जिनमें मुख्य पद इस प्रकार हैं डिप्टी कलेक्टर: 17 पद डीएसपी DSP 18 पद ,पंचायत एवं ग्रामीण विकास: 15 पद ,आबकारी विभाग: 10 पद ,वाणिज्यकर अधिकारी: 03 पद अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। प्रारंभिक विज्ञापन में पदों की संख्या बहुत कम रखी जाती है जिससे मुख्य परीक्षा तक पहुँचने वाले उम्मीदवारों की संख्या भी सीमित हो जाती है। प्रतियोगियों का सवाल है कि सेवानिवृत्ति और विभागों के विस्तार के बाद भी पदों को विज्ञापित क्यों नहीं किया जा रहा?
प्रशासनिक सुस्ती या जानबूझकर देरी
इंदौर जो एमपीपीएससी की तैयारी का गढ़ माना जाता है वहां के छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार नई नियुक्तियों को लेकर गंभीर नहीं है। छात्रों के अनुसार एक ओर सरकार बेरोजगारी दूर करने के दावे करती है वहीं दूसरी ओर सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों की भर्ती में कंजूसी बरती जा रही है। 10 जनवरी से शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया 9 फरवरी तक चलेगी लेकिन कम पदों के कारण आवेदन करने वाले युवाओं का मनोबल गिरा हुआ है।
आयोग का पक्ष: शासन के पाले में गेंद
इस विवाद पर एमपीपीएससी का कहना है कि आयोग केवल उन पदों के लिए विज्ञापन जारी करता है जिनका मांग पत्र (Requisition) शासन के विभिन्न विभागों से प्राप्त होता है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक यदि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से पहले शासन नए पदों का अधियाचन भेजता है तो पदों की संख्या में वृद्धि की जा सकती है और अधिसूचना में संशोधन किया जाएगा।
भविष्य की चेतावनी
नाराज अभ्यर्थियों ने मांग की है कि परीक्षा से पहले सभी रिक्त पदों को इस भर्ती में जोड़ा जाए। यदि सरकार ने पदों की संख्या नहीं बढ़ाई तो छात्र आंदोलन की राह भी चुन सकते हैं।
