
नर्मदापुरम 18 जनवरी 2026 (हिन्द संतरी ) जिले में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी की घोर लापरवाही का परिणाम है की पुरे जिलें में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चौपट है और वाहनों की स्पीड पर ब्रेक न लग सकने के कारण आम लोगों की जान को खतरा बढ़ता जा रहा है| हाल ही में जिले की सोहागपुर में प्रशासन पूरी तरह असफल दिखा जिसके कारण नशे में बसों को चल्र रहे कंडेक्टर हादसों को अंजाम देता रहा किन्तु प्रशासन जैसे गहरी नींद सोये हुए रहा जो अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड दिखे| यहाँ सड़कों पर नियम कानून कायदे की फ़िक्र करने की बजाय इसे अपनी मुट्ठी में रखकर मनमानी करना थम नही पा रहा है| परिणाम स्वरूप इस समय बसें, यात्रियों से मारपीट, फरार चालक — हादसों के बाद भी सोया प्रशासन, कब जागेगा सिस्टम?
सोहागपुर की सड़कों पर अब नियम नहीं, अराजकता का राज है। शोभापुर में रामलीला मंदिर के सामने हुई ताज़ा घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां इंसानी जान की कोई कीमत नहीं बची। शिवहरे बस सर्विस की बस का चालक खुलेआम नशे की हालत में सवारियों को लेकर दौड़ता रहा। जब यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए विरोध किया, तो ड्राइवर और कंडक्टर ने कानून को पैरों तले रौंदते हुए मारपीट शुरू कर दी।इस बर्बरता में पिपरिया निवासी एक यात्री घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। भय, चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच बस का कांच टूट गया, लेकिन सवाल यह नहीं कि कांच किसने तोड़ा — सवाल यह है कि यह हालात पैदा ही क्यों होने दिए गए? घटना के बाद दोषी चालक-कंडक्टर फरार हो गए, और हमेशा की तरह पुलिस प्रशासन देर से मौके पर पहुंचकर औपचारिकता निभाता नजर आया।
यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि हर दिन दोहराई जाने वाली कहानी है। कुछ ही दिन पहले बस पलटने की घटना में कई जिंदगियां बाल-बाल बचीं, फिर भी न तो बसों की जांच बढ़ी, न नशे में वाहन चलाने वालों पर शिकंजा कसा गया। परिवहन विभाग की चेकिंग सिर्फ कागजों में चल रही है और पुलिस की सख्ती फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है।सबसे डरावनी बात यह है कि प्रशासन तब जागता है जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है। आज एक घायल है, कल कई लाशें होंगी — और तब भी बयान आएंगे कि “जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”कब तक सोहागपुर के लोग प्रशासन की इस लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? साफ है — अगर यही हाल रहा तो सड़क पर चलना अपराध बन जाएगा और प्रशासन की यह चुप्पी सीधे-सीधे मौत की साझेदार कहलाएगी
दौर की घटना एवं मनरेगा के कानूनी अधिकार समाप्त करने के विरोध मे कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास एवं मौन धरना आयोजित
