
नर्मदापुरम 15,जनवरी,2026(हिन्द संतरी ) माखननगर से नीलेश यादव—-
“एक भारतीय आत्मा” के नाम से प्रख्यात पंडित माखनलाल चतुर्वेदी भारतीय पत्रकारिता, साहित्य और राष्ट्रवादी चेतना के ऐसे पुरोधा थे, जिन्होंने अपनी लेखनी को स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त माध्यम बनाया। वे कवि, संपादक, चिंतक और निर्भीक पत्रकार के रूप में सुविख्यात रहे। 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के माखन नगर (पहले बाबई) तहसील में जन्में पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने जब देश में पत्रकारिता शुरू की तो संपूर्ण देश में राष्ट्रीय आंदोलन का प्रभाव देखा जा रहा था। राष्ट्रीय एवं समाज सुधार की चर्चाएं और अंग्रेजी हुकूमत को देश से बाहर करने की भावनाएं ओजवन थी। इसी के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसे तेजस्वी विभूति के आगमन ने सारे आंदोलन को एक नई ऊर्जा से भर दिया था। दादा माखनलाल भी ऐसे ही गांधी भक्तों की टोली में शामिल थे। गांधी जी के जीवन दर्शन से उदीप्त दादा माखनलाल ने रचना और कर्म के स्तर पर जिस तेजी के साथ राष्ट्रीय आंदोलन को ऊर्जा एवं गति दी वह अतुलनीय था।
निर्भीक पत्रकारिता के शिखर पुरुष जिन्होंने राष्ट्र के लिए किया अपनी लेखनी को समर्पित
माखन दादा के 56 सालों के उच्च पूर्ण पत्रकारिता की यात्रा में उन्होंने ‘कर्मवीर’, ‘प्रताप’ और ‘प्रभा’ जैसे पत्रों के माध्यम से स्वाधीनता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और जनजागरण की अलख जगाई। उनकी पत्रकारिता ओजस्वी, प्रभावकारी और राष्ट्रप्रेरक थी, जिसने जनमानस को आंदोलित किया। साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनाएँ—विशेषतः ‘पुष्प की अभिलाषा’—भारतीय आत्मा, त्याग और बलिदान की अमर अभिव्यक्ति हैं। उनकी लेखनी में देशप्रेम, मानवीय संवेदना और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनके लंबे पत्रकारिय जीवन के माध्यम से उन्होंने नई पीढ़ी को रचना और संघर्ष का जो पाठ पढ़ाया वह आज भी हतप्रभ करता है। शायद इसीलिए उन्हें एक भारतीय आत्मा कहा जाता है। दादा माखनलाल का जीवन पत्रकारिता के प्रति अटूट समर्पण और निस्वार्थ प्रेम का उदाहरण रहा। उन्होंने शिक्षक का पद त्यागकर पत्रकारिता को अपना साध्य बनाया। जीवनपर्यंत उन्होंने किसी प्रकार के पुरस्कार, अलंकरण अथवा भौतिक लाभ की आकांक्षा नहीं की। यही सादगी, निष्ठा और निर्भीकता उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने देश में एक पत्रकारिता विद्यापीठ स्थापित करने का स्वप्न देखा था। जहां विविध विषयों का एक प्रकांड ग्रंथ संग्रहालय भी हो। उनका यह स्वप्न मध्य प्रदेश के भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नाम से स्थापित संस्थान ने पूरा किया।
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी भारत भूमि के एक निर्भीक एवं ओजवान पत्रकार के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। शायद यह कहना भी गलत नहीं होगा कि भारत देश में रचनात्मक और निर्भीकता से पत्रकारिता करने के जनक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ही थे। वे अपनी सरल किंतु मर्मभेदी भाषा के लिए जाने जाते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उनके वक्तृत्व और प्रभाव के संबंध में कहा था— “हम सब लोग तो बात करते हैं, भाषण देना तो माखनलाल जी ही जानते हैं।” पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के सम्मान में महात्मा गांधी स्वयं माखन नगर आए थे और उन्होंने कहा था कि “मैं बाबई इसलिए आया हूँ क्योंकि यह माखनलाल जी की जन्मभूमि है और जिस भूमि ने माखनलाल को जन्म दिया है, उसे मैं सम्मान देना चाहता हूँ।” दादा माखनलाल सर्वतोमुखी व्यक्तित्व के धनी थे और कालजई कृतित्व के कारण ही वे आज उच्च शिखर पर प्रतिष्ठित हैं और हमेशा रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 16 जनवरी को माखननगर में माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर प्रतिमा स्थल पर 101 फीट के ध्वजा स्थापित करेंगे।
माखननगर एक नजर में
उल्लेखनीय है कि जनपद पंचायत का गठन 1972 में हुआ है पूर्व में जनपद पंचायत बाबई के नाम से जानी जाती थी। 04 अप्रैल 2022 को दादा माखनलाल चतुर्वेदी “एक भारतीय आत्मा” का जन्म स्थल होने के कारण 04 अप्रैल 2022 को गौरव दिवस होने के कारण बाबई का नाम माखन नगर किया गया। वर्तमान में जनपद पंचायत माखन नगर की जनसंख्या 128950 हैं। जिला पंचायत के 02 वार्ड, जनपद पंचायत के 21 जनपद वार्ड एवं 64 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 129 ग्रामें में बटा हुआ है, जिसमें 23 ग्राम सतपुड़ा टाईगर रिजर्व से विस्थापन उपरांत जनपद पंचायत माखन नगर की सीमा में बसाये गये हैं।
जनपद पंचायत की उत्तरीय सीमा नर्मदा नदी से लगी हुई है जिस पर मुख्य तीर्थ स्थल सूरजकुंड एवं गौ घाट स्थित हैं, जिसका वर्णन नर्मदा पुराण में उल्लेखित हैं। पश्चिमी सीमा तवा नदी से लगी हुई हैं, तवा एवं नर्मदा नदी का संगम स्थल बांद्राभान है। दक्षिणी सीमा सतपुड़ा की पहाड़ियों से लगी हैं जिसमें मुख्य दा स्थल सिद्ध महाराज पम पंचायत नया धाँई के ग्राम डोब में स्थित हैं, जिससे निरंतर जलधारा बह रही हैं। पूर्व की सीमा मारू नदी से लगी हुई हैं, जिसका संगम नर्मदा नदी में हैं। साथ ही एमपी एग्रो का 3264 एकड़ का फार्म हैं जिसमें ग्राम मोहासा को औद्योगिक क्षेत्र घोषित हैं तथा कई ईकाईयां प्रारंभ होकर शेष की संरचना प्रगतिरत हैं। इसी एमपी एग्रो फार्म में माता महाकाली का मंदिर हैं जो दर्शनीय हैं।
