
नर्मदापुरम 26,फरवरी,2026(हिन्द संतरी के लिए नीलेश यादव ) मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जिले के विकासखंड सिवनीमालवा, ग्राम नंदरवाड़ा में संचालित “खुशी आजीविका समूह” की सदस्य श्रीमती चम्पा कुशवाहा ने आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल पेश की है। चम्पा कुशवाहा ने अपने जीवन की शुरुआत अनेक आर्थिक चुनौतियों के बीच की। परिवार की आजीविका चलाने के लिए वे मजदूरी करती थीं, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 1,000 से 2,000 रुपये तक की आय ही हो पाती थी। वर्ष 2017 में ग्राम में गठित स्व-सहायता समूहों की जानकारी मिलने पर मिशनकर्मियों एवं ग्राम की महिलाओं के प्रोत्साहन से उन्होंने “खुशी आजीविका समूह” से जुड़ने का निर्णय लिया।
समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने आटा चक्की का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस उद्यम से उनकी मासिक आय 5,000 से 7,000 रुपये तक पहुंच गई। आगे बढ़ते हुए चम्पा ने किराना दुकान एवं गल्ला खरीदी का कार्य भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन से व्यवसाय में निरंतर वृद्धि हुई और आय के नए स्रोत विकसित हुए। वर्तमान में चम्पा कुशवाहा को आटा चक्की एवं किराना दुकान से नियमित आय प्राप्त हो रही है, साथ ही गल्ला खरीदी से अतिरिक्त लाभ भी मिल रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त वे आजीविका मिशन के अंतर्गत सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय अर्जित हो रही है। आज श्रीमती चम्पा की व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 12,000 रुपये हो गई है, जो पूर्व की आय की तुलना में कई गुना अधिक है। उनके परिवार की कुल आय भी बढ़कर लगभग 18,000 रुपये प्रतिमाह हो गई है। श्रीमती चम्पा कुशवाहा की सफलता की यह कहानी ग्राम नंदरवाड़ा की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उनके उदाहरण से प्रेरित होकर अनेक महिलाएं भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में अग्रसर हो रही हैं। चम्पा की यह उपलब्धि दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, सामूहिक सहयोग और दृढ़ संकल्प से कोई भी महिला अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
