नर्मदापुरम 01मार्च 2026 (हिन्द संतरी) केन्द्रीय और प्रादेशिक स्तर पर निर्वाचित सरकार की अधीनस्थता में शासन और जिला प्रशासन सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन कर उन्हें सौपी गई सभी भूमिका निभाता है | कलेक्टर के अधीनस्थ अनेक विभाग है और उनके जितने विभाग उतने अधिकारी है जो जिला प्रशासन की इकाई के रूप में है| सांसद, विधायक, सहित स्थानीय निकायों में जिला पंचायत अध्यक्ष, नगरपालिका अध्यक्ष आदि जनप्रतिनिधियों से जिला प्रशासन की जबावदेही सार्थक भागीदारी को होती है जिसमें जिला प्रशासन जीवंत और मजबूत दिखे किन्तु आज जिस प्रकार विधानसभा में जिला प्रशासन से आपसी सहयोगी के बतौर प्रश्नों का जबाव लिया जा सकता है उनसे न लेकर विधानसभा में विधायक द्वारा पूछे जा रहे है उससे यह सन्देश जा रहा है की सरकार और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं है|
जैसे एक आम व्यक्ति का परिचय केंद्र या राज्य सरकार से नहीं होता, जिला प्रशासन से होता है, उसे पता होता है स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा है और क्या करने में नाकामयाब रहा है, कही यही रोजमर्या का सवाल सरकार की जगह अब सांसद और विधायकों के लिए पैदा नहीं होता है जो सरकार की योजनाओं –विकास के कार्यों के लिए जिम्मेदार जिला प्रशासन से सवाल जबाव करें ताकि जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारीयों को योजना-कार्य की प्रगति के साथ-साथ जबाव के लिए तैयार रहना पड़े और जनप्रतिनिधियों के सवालों के कारण सतर्क रहा अपनी जिम्मेदारी से न बच सके ?
नर्मदापुरम के विधायक डॉ सीताशरण शर्मा प्रदेश ही नही देश में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते लोकप्रिय है और उनकी जनहितैषी छवि है उनके द्वारा जिस सवाल का जबाव स्थानीय स्तर पर कलेक्टर से प्राप्त कर सकते थे वह उनसे न प्राप्त कर अपने अधिकार का प्रयोग कर विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय से करना कि नर्मदापुरम् जिला नर्मदापुरम् की अंडर ग्राउंड सीवरेज योजना के काम के दौरान 28 फरवरी 2024 को नंदविहार कॉलोनी में गड्ढे में गिरने से मजदूर की मृत्यु की घटना की मजिस्ट्रियल जाँच के आदेश कलेक्टर, नर्मदापुरम् द्वारा दिये गये थे? प्रति उपलब्ध कराते हुए जांच प्रतिवेदन उपलब्ध करावें। (ख) यदि हों, तो आदेश की प्रति दी जावे जिसके उत्तर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दो शब्दों में ”” जी नहीं।“” का जबाव देकर प्रश्न समाप्त कर दिया जबकि वे यही बात कलेक्टर से प्राप्त कर सकते थे, जो बताता है की या था विधायक और कलेक्टर के संबध ठीक नहीं है या संवाद की कमी है जो उनके स्तर की जानकारी मंत्री के माध्यम से पूछने को विवश होना पड़ा । इस प्रश्न पर अगर उन्हें मजदुर या उसके परिवार की चिंता रही तो सरकार या जिला प्रशासन से मदद करा सकते थे और एफआईआर करा सकते थे दो साल बाद उनकी चिंता राजनैतिक गलियारे में चर्चा का विषय बनी है।
लोक निर्माण मंत्री से भोपाल, इंदौर एवं नर्मदापुरम संभागों में जिलेवार ओव्हर ब्रिज उनकी दो भुजा () आकार में) तीन भुजा (1) आकार में) और चार भुजा के निर्माण वर्ष आदि इतिहास की जानकारी के साथ भुजाओं के सड़क दुर्घटनाओं की चिंता का प्रश्न का जबाव लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र ‘अ‘ एवं ‘अ-1′ अनुसार है। से विधायक कितने संतुष्ट हए यह समझ नही आता है बाकि जबाव को विधायक श्री शर्मा बेहतर समझते है। नर्मदापुरम जिले में ग्राम पंचायत रायपुर के रायपुर से मालाखेड़ी नर्मदापुरम मार्ग हेतु विधायक डॉ शर्मा जी द्वारा किया प्रश्न की उक्त हेतु कब कितनी राशि की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाकर किस ठेकेदार को कब कार्यादेश जारी किया गया। उक्त कार्यादेश अनुसार उक्त कार्य कब तक पूरा होना था। (ख) कार्यादेश जारी किये जाने के बाद से अभी तक उक्त मार्ग का कितना कार्य हुआ एवं कितना भुगतान कब-कब हुआ। (ग) उक्त कार्य कब से किन कारणों से बंद है। कार्य प्रारंभ करने हेतु ठेकेदार को कब-कब नोटिस जारी किये गये। (घ) प्रश्नांश (क) वर्णित ठेकेदार को नर्मदापुरम संभाग में किन-किन्न कार्यों का कार्यादेश दिया गया है। उक्त कार्यों की क्या स्थिति है। (ड.) शासन द्वारा संबंधित ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्यवाही की गयी। (च) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित मार्ग का कार्य कब तक प्रारंभ हो सकेगा। (छ) क्या प्रश्नांश (क) में उल्लेखित ठेकेदार को उक्त मार्ग एवं अन्य मार्गों के लिए अग्रिम भुगतान किया गया है, यदि हों, तो किन प्रावधानों के अंतर्गत किसके आदेश से। क्या यह नियमानुकूल है, का उत्तर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने देते हुए सदन को बताया कि प्रश्न (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ग) जी नहीं, कार्य प्रगति पर है। नोटिस संबंधित विवरण संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-व अनुसार है। (ड.) अनुबंधानुसार ठेकेदार को समय-समय पर नोटिस दिए जाकर विलम्ब हेतु चलित देयक से राशि की कटौत्री की गयी है। (च) वर्तमान में कार्य प्रगतिरत है। (छ) जी नहीं, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता
इसके आलावा डॉ शर्मा ने रैसलपुर-रिधौडा-बम्हनगांव, रैसलपुर-पांजराकलॉ, सतरास्ता-बी.टी.आई. ब्यावरा-रोहना, निटाया – निमसाडिया की सीटीई से जांच कराने,ठेकेदार, भुगतान आदि की जानकारी चाही है वहीँ उर्जा मंत्री से नर्मदापुरम् जिले के इटारसी से लगे ग्राम रंडाल, ग्राम सोनासॉवरी में बढ़ती आबादी एवं कॉलोनी की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए सुविधाजनक विद्युत आपूर्ति हेतु सब स्टेशन आदि की जानकारी चाही है किन्तु ये सारी जानकारी स्थानीय स्तर पर प्राप्त की जा सकती थी पर सदन के माध्यम से अधिकारियों की भेजी इन जानकारी में टालमटोल हुई जिससे विधायक वंचित होते हुए भी अपनी सरकार के समक्ष अधिकारियों की भेजी आधी अधूरी जानकारी प्राप्त करने को विवश हुए, यह सब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच के संबंधो की दूरी का पहला उदाहरण नहीं अपितु पुरे प्रदेश का यही आलम है और सरकार अधिकारियों को कठपुतली बनाकर नचा रही है और अपना उल्लू सीधा कर राजनैतिक संरक्षण दिए ही है ।
