
नर्मदापुरम/नईदिल्ली 13 फरवरी 2026 (हिन्द संतरी) राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया ने प्रदेश के खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं और उनके विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कोयला, हीरा, चूना पत्थर और बॉक्साइट जैसे बहुमूल्य खनिजों से समृद्ध है, लेकिन इन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को अब भी कई बुनियादी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। डीएमएफ फंड के पारदर्शी उपयोग पर जोर डालते हुए सांसद नारोलिया ने जिला खनिज प्रतिष्ठान जिला माइंनिग फंड के तहत मिलने वाली राशि के असमान वितरण पर चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की डीएमएफ फंड निधियों का उपयोग पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए, ताकि खनन प्रभावित परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने की भी वकालत की।
कौशल विकास और रोजगार की मांग को दृष्टिगत रख कर युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए श्रीमती नारोलिया ने कहा, “केवल खनन काफी नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में ‘डाउनस्ट्रीम उद्योगों’ को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए स्थायी रोजगार पैदा होंगे।” उन्होंने इन क्षेत्रों में विशेष कौशल विकास केंद्र खोलने की आवश्यकता पर भी बल दिया। पर्यावरण और समावेशी विकास को केंद्र में रखकर सांसद ने पर्यावरण संरक्षण को अनिवार्य बताते हुए कहा कि खनिज संसाधनों का दोहन इस प्रकार हो कि प्रकृति को नुकसान न पहुँचे। उन्होंने प्रभावी निगरानी तंत्र और समावेशी विकास की मांग करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्रीय संतुलन नहीं बनेगा, तब तक संसाधनों की सार्थकता अधूरी है।
