
नर्मदापुरम 9 फरवरी 2026 (हिन्द संतरी) नजूल विभाग के अफसरों की मनमानी से नर्मदापुरम नगर के मध्य करोड़ोंं रूपये मूल्य की 25 हजार 690 वर्गफिट खुली नजूल भूमि को अवैध रूप से ठिकाने लगाने का पता चला है। उक्त सम्पत्ति किसने किसे खुर्द-बुर्द की, अभी किसके नाम पर है आदि की जानकारी नजूल विभाग के पास नहीं है, उल्टे जहॉ आलीशान मकान और बिल्डिगें बनी है, उस भूमि को नजूल विभाग आज भी अपने रिकार्ड में रिक्त प्लाट बताकर गुमराह कर रहा है। नजूल विभाग के रिकार्ड के अनुसार जब यहॉ खुली भूमि है तब वह कहॉ गायब हो गयी, यह अनुसंधान का विषय है जिसकी जॉच करना और गायब हो चुके सीमाचिन्हों से नप्ती कराना कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना के लिए एक चुनौती है, जो पिछले चार दशकों में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम एवं नजूल विभाग में पदस्थ रहे सभी जिम्मेदारों को कटघरे में खड़ा करता है।
सुचना के अधिकार के तहत जब नजूल विभाग से जब शहर के बीचोबीच नयेजयस्तम्भ चौक से होते हुये अर्जुन काम्पलेक्स के सामने कुम्हार गली के नाले से होते हुये एडव्होकेट शंकरसिंह ठाकुर की धर्मशाला तक के नजूल शीट नं.20 प्लाट नं.239 की 3115 वर्गफिट एवं प्लाट नं. 241/1 की 22,575 वर्गफिट की खुली जगह (कुल 25,690 वर्गफिट) की जानकारी चाही तो नजूल के खसरे रिकार्ड व नक्शे में उक्त दोनों प्लाट पर उक्त भूमि को रिक्त बतलाया जबकि उक्त दोनों प्लाटों पर किसी भी प्रकार की कोई भी भूमि रिक्त नहीं है और वहॉ व्यवसायिक एवं आवासीय परिसर व दुकानों का महाजंजाल खड़ा है। नजूल विभाग जिसे अपने रिकार्ड में सालों से और वर्तमान में भी खुली भूमि बताता आ रहा है उसपर कब किसे,किस प्रकार प्लाटों का हस्तान्तरण , नामान्तरण एवं निर्माण किया गया, यह यक्षप्रश्न अपने आप में नजूल विभाग द्वारा रिकार्ड का सही संधारण न करने से पूरे विभाग को संदेह के कटघरे में खड़ा किये हुये है।
नागरिक अधिकार जनसमस्या निराकरण कमेटी द्वारा पूर्व में कलेक्टर को इसकी शिकायत कर जांच की मांग की गई किन्तु ठाक के तीन पात निकले और कोई समाधान आज तक नही निकल सका । सवाल पैदा होता है कि अगर उक्त प्लाटों के अलावा नगर में नजूल रिकार्ड मेंं अन्य सभी नजूल शीटों पर रिक्त बतलाये गये प्लाटों की जॉच की जाये तो कई चौकाने वाले तथ्य उजागर होगे और वहॉ रिक्त प्लाट की जगह निर्माण मिलेगा। यह एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार होगा जिसमें नजूल विभाग के कई राजस्व निरीक्षक, पटवारी, सहित नजूल कलेक्टर एवं कर्मचारियों पर ऑच आयेगी। नागरिक अधिकार जनसमस्या निराकरण समिति के अध्यक्ष ने स्थानीय सतरास्ते से नर्मदाघाट तक के मुख्य बाजार क्षैत्र एवं उसमें आने वाले रहवासी क्ष्ैत्र सहित जिला चिकित्सालय अस्पताल से मंगलवारा घाट तक मोहल्ले एवं बाजार क्षैत्र में नजूल भूमि पर किये गये अतिक्रमण के रहते प्रमुख मार्गो की दुकानें सड़क पर होने से वे सकरी हो गयी है और खसरे में नामांकित/दर्ज नजूल भूमि व पटटे पर प्राप्त भूमि के क्षैत्रफल से दुगुनी भूमि पर लोगों द्वारा पक्के निर्माण होने से अतिक्रमण विस्फोटक रूप ले चुका है, जिसमें अगर अतिक्रमण हटाने की मंशा से कार्यवाही की जाये तो यह शहरी क्षैत्र खण्डहर में बदल सकता है, बशर्ते अतिक्रमण हटने से बाजार क्षैत्र में दबाव कम होगा और आये दिन यातायात जैसी समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकेगी।
