
नर्मदापुरम 17 फरवरी 2026 (हिन्द संतरी) शिवार्चन समिति सहित नगर में जगह जगह शिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया गया, पवित्र नर्मदा घाटो के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब देखकर सभी आश्चर्यचकित थे, जहा देखो वहा आकाश में ओम् नमः शिवाय की गूंज थी तो वही ‘हर हर महादेव” के जयघोष से “काले महादेव” की शाही सवारी के दर्शनों ने सभी का मन मोह लिया था| शिवार्चन समिति के तत्वाधान विगत 39वर्षों से आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव में 40वे वर्ष में पूज्य गुरुदेव आचार्य सोमेश परसाई जी ने शिवभक्तों को संबोधित करते हुए कहा भगवान शिव संसार को जोड़ते हैं। भगवान शिव का एक मात्र दरबार है जहां सर्प है, तो शिकारी मयूर भी है, बैल है तो भगवती का वाहन शेर भी है।किंतु सभी शिव परिवार के साथ प्रेमपूर्वक है। मानो संसार को संदेश दे रहे हैं कि शिव राग द्वेष को समाप्त कर मोक्ष को देने वाले हैं ।
आचार्य श्री परसाईं ने कहा कि कलयुग में श्रद्धा भाव से भगवान का नाम ले लेने मात्र से अनंत फल की प्राप्ति होती है । हट योग से जीवन बन जाता है और जीवन बिगड़ जाता है । जरा सी प्रतिकूल परिस्तिथि में हम भगवान को कोसने लगते है । हम स्वार्थी हो गए है हम भगवान से भी व्यापार करना चाहते है । हम नाना प्रकार की कबूलना करते है ये व्यापार ही तो है ।वो परम पिता सबका पिता है, उससे मांगने की क्या आवश्यकता है। हम जिस वस्तु के योग्य है, ईश्वर हमे स्वतः ही प्रदान कर देते है । आचार्य ने शिवाराधना का महत्त्व बताते हुए कहा कि भगवान शिव औघड़दानी हैं भगवान शिव नवग्रहों के भी स्वामी है शिवभक्ति करने वाले भक्तों पर ग्रहों की कुदृष्टि कभी नही पड़ती। कुंडली के दोषों को मिटाने का सामर्थ्य केवल भगवान शिव में हैं । इसके पश्चात आचार्य श्री ने कहा कि तीन रात्रियों का महत्त्व है जिनमे से शिवरात्रि प्रमुख है ।
आज शिवलिंग का प्राकट्य भी हुआ है । आज भगवान शिव की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है । भगवान् शिव का नाम कल्याण स्वरुप है। इनके पूजा मात्र से त्रिविध तापों का नाश संभव है । आज के दिन अभिषेक का सर्वाधिक महत्त्व है । इसके पश्चात भगवान् शिव के रुद्राभिषेक हुआ, जिसमे दूध दही घी शहद सहित नाना प्रकार के द्रव्यों से भगवान् शिव का अभिषेक हुआ। भगवान् का रूद्र सूक्त व शिवमहिम्न से संगीतमय अभिषेक किया गया । विल्वपत्र महत्त्व व महाशिवरात्रि की कथा के बारे में प्रकाश डालते हुए गुरु देव ने कहा आज के दिन भगवान् शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने का सर्वाधिक महत्त्व है । सृष्टि भी त्रिगुणमयी है और बिल्वपत्र में तीन ही पत्तिया है। तीन पत्ती वाली बिल्वपत्र का ही सर्वाधिक महत्त्व है। एक बिल्वपत्र तीन जन्मों के पाप समाप्त करती है। पतित पावन माँ नर्मदा का हर कंकर,शंकर है,नर्मदा नदी के शिवलिंग का अभिषेक करने से कष्टों का निवारण होता है, नर्मदा शिवलिंग (नर्मदेश्वर) स्वंयभू होते हैं इनकी प्राण प्रतिष्ठा करने की आवश्यकता नहीं होती है,भगवान की सुंदर स्तुतियां शिवमहिम्न स्तोत्र, शिवपंचाक्षर स्तोत्र, लिंगाष्टक, रुद्राष्टक का संगीतमय गान किया गया । भगवान की दिव्य भस्म आरती एवं महाआरती की गई, तत्पश्चात प्रसादी वितरण सम्पन्न हुआ ।
