नर्मदापुरम 02 दिसंबर 2025(हिन्द संतरी ) आज मंगलवार को सोहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने विधानसभा में कीर समाज के उत्थान के लिए प्रश्न उठाकर कीर समाज को पुनः ‘स्वतंत्र जाति’ के रूप में सूचीबद्ध किये जाने की मांग रखी । उन्होंने सदन को बताया कि मध्यप्रदेश के 22 जिलों में निवासरत कीर समाज का पारंपरिक एवं मुख्य व्यवसाय सदैव से कृषि कार्य, कृषि मजदूरी, नदियों में डंगरवाड़ी तथा सब्ज़ियों का उत्पादन रहा है। कीर समाज का जीवन, संस्कृति और आर्थिक आधार इन्हीं व्यवसायों के इर्द-गिर्द सदियों से स्थापित है और मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग की पूर्व सूची में कीर समाज को 21 वें क्रमांक पर स्वतंत्र जाति के रूप में उल्लेखित किया गया था, किन्तु मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग की वर्तमान सूची में कीर समाज को क्रमांक 12 पर प्रतिस्थापित कर ढीमर, भोई, कहार, धीवर/मल्लाह/नावड़ा, तुरहा, केवट (कश्यप, निषाद, राजकुमार, बाथम), कीर व्रितिया, सिंगरहा, जालारी तथा सोंधिया जातियों के साथ जोड़ा गया है तथा व्यवसाय में मछली पकड़ना, नाव चलाना, पालकी ढोना, घरेलू सेवा, सिंघाड़ा/कमलगट्टा उत्पादन, पानी भरना आदि व्यवसायों का उल्लेख किया गया है।
विधायक श्री पाल ने सदन में शासन का ध्यानाकर्षण किया की यह तथ्यात्मक त्रुटि के कारण कीर समाज की सांस्कृतिक एवं आर्थिक पहचान को विकृत करती है, बल्कि समाज को प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक भ्रम एवं असंगतियों का सामना भी करना पड़ रहा है और वे संरक्षित नहीं है|अगर कीर समाज को पुनः ‘स्वतंत्र जाति’ के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है तो वह उनके व्यवसाय श्रेणी में केवल वास्तविक पारंपरिक व्यवसाय जैसे कृषि, कृषि मजदूरी, डंगरवाड़ी, सब्ज़ी उत्पादन का ही उल्लेख किया जाना आवश्यक है वही कीर समाज के इतिहास, परंपरा, आजीविका एवं सामाजिक पहचान के संरक्षण के लिए उन्हें स्वतंत्र जाति में सूचीबद्ध करना आवश्यक ही नहीं अपितु अत्यंत महत्वपूर्ण होगा ।
