
नर्मदापुरम 15,फरवरी,2026(हिन्द संतरी) महारष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के लोग भगवान शिव को अपना बहनोई तथा देवी पार्वती को अपनी बहन मानते है, इसलिये विशेष रूप से विदर्भ के 1 लाख से अधिक श्रद्धालू महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के दर्शन करने और मान्यता पूरी होने वाले त्रिशूल भेंट देने पचमढ़ी पधारे। नर्मदापुरम जिले में महाशिवरात्रि पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का अद्भुत जनसैलाब उमड़ा। 4000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित चौरागढ़ मंदिर से लेकर प्राचीन पाषाण प्रतिमा सोहागपुर, नर्मदापुरम बाबा काले महादेव, इटारसी के तिलक सिंदूर और शरद देव मंदिर, सिवनिमालवा के गणेश-शिव मंदिर एवं आंवली घाट पर स्थापित शिव प्रतिमा तक हर ओर भगवान भोलेनाथ के जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं की असीम श्रद्धा से पूरा जिला शिवमय नजर आया। जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रमुख स्थलों पर व्यापक भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासनिक सतर्कता और समन्वय के चलते समस्त स्थानों पर पर्व पूरी श्रद्धा, भक्ति और शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
महाशिवरात्रि पर पचमढ़ी में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक स्वयं उपस्थित रहकर महादेव मेले की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे। वहीं सोहागपुर में आयोजित मेले का अपर कलेक्टर राजीव रंजन पांडे द्वारा निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। इटारसी में तिलक सिंदूर मेले के दौरान अपर कलेक्टर राजीव रंजन पांडे एवं एसडीएम नितेश शर्मा मंदिर परिसर में मौजूद रहकर सभी इंतजामों की सतत निगरानी करते रहे। स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं स्वच्छता की दृष्टि से भी प्रशासन द्वारा हर एक पॉइंट पर अलग-अलग टीमों को तैनात किया गया था जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं एवं जानकारी का आदान-प्रदान निरंतर रूप से किया गया। आपदा प्रबंधन के लिए होमगार्ड एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा निरंतर रूप से श्रद्धालुओं की सहायता की गई। ऊंचे ऊंचे स्थलों तथा दुर्गम मार्गो से भी श्रद्धालुओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा भी प्राथमिक उपचार की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर मेडिकल पॉइंट तथा एंबुलेंस की व्यवस्था की गई जिससे श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता प्रदान की जा सके।
कलेक्टर एवं एसपी ने देर रात पचमढ़ी पहुंचकर संभाली मेले की कमान

कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना ने देर रात पचमढ़ी पहुंचकर महादेव मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शिवरात्रि पर्व के मद्देनज़र श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सतत मॉनिटरिंग बनाए रखने तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने महादेव मंदिर, मंदिर पार्किंग तथा डीपी पॉइंट का भ्रमण कर सुरक्षा, यातायात, पेयजल, प्रकाश एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने मेले में स्थापित विभिन्न मेडिकल पॉइंट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अमले से उपचार व्यवस्था, उपलब्ध दवाइयों एवं आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की जानकारी ली और आवश्यकतानुसार तत्परता बनाए रखने के निर्देश दिए। इस दौरान पुलिस अधीक्षकसाइ कृष्ण एस थोटा, सीईओ जिला पंचायत हिमांशु जैन, एसडीएम पिपरिया आकिप खान सहित अन्य समस्त संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
पचमढ़ी महादेव मेला

पचमढी में महाशिवरात्री के पावन पर्व पर भक्तों के भारी जनसमूह से पूरा क्षेत्र किसी शिवधाम से कम नहीं लग रहा है। दुर्गम मार्ग होने के बाबजूद पूरी श्रद्धा एवं अस्था के साथ महादेव एवं चौरागढ जा रहे हैं। शिवरात्रि पर्व पर लगभग 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पचमढी को भगवान शिव की तपस्या स्थली माना जाता है। मान्यता है कि महारष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के लोग भगवान शिव को अपना बहनोई तथा देवी पार्वती को अपनी बहन मानते है, इसलिये विशेष रूप से विदर्भ के श्रद्धालू महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को त्रिशूल भेंट देने आते है। 4000 फिट से भी अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस प्राचीन आस्था केंद्र पर भगवान चौड़ेश्वर् मंदिर में भगवान भोलेनाथ की प्राचीन शिवलिंग सहित मनमोहक प्रतिमा और चौरा बाबा की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्तजन बडे बडे एवं सैकड़ों किलो भारी त्रिशूल लेकर अपने आरध्य को अर्पित करने के लिये दुर्गम रास्तों से पहुँचते हैं तथा कई श्रद्धालू अपनी मनोकामना पूरी होने पर ही मंदिर में त्रिशूल भेंट करते हैं। एक अन्य किवदंती के अनुसार चौरा महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देकर यह वर दिया की यह दर्शन करने से सभी को मनोकना पूरी होगी। मनोकाना पूरी होने के बाद भक्त मन्नत रूपी त्रिशूल यहां चढ़ते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए त्रिशूलों का अंबार लगा हुआ है जो इनकी अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था एवं भक्ति को परिलक्षित करता। इसी प्रकार पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव एवं गुप्त महादेव भी अपने पौराणिक महत्व को समेटे हुए हैं। चौरागढ़ महादेव के समांतर ही इन मंदिरों में भी भक्तों की लंबी कतारें इस दौरान देखी गई। उक्त दोनों मंदिरों में भी भक्तों ने दर्शन कर मनोकामना पूर्ति एवं कल्याण के लिए प्रार्थनाएं की।
