
नर्मदापुरम 01,जनवरी,2026 (हिन्द संतरी )नर्मदापुरम जिला अजीब है यहाँ अधिकारीयों को अपने अधिकार और पावर का पता नहीं है , यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार देश में 14 करोड़ बालश्रमिक है जो अपनी मज़बूरी सहित अनेक कारणों से काम करने को विवश होते है जिसपर सरकार को उनके विषय में जागरूक रहना चाहिए किन्तु श्रम विभाग के अधिकारियों की चेतनाशून्य होने से मामले उजागर ही नहीं होते है | भला हो कलेक्टर सोनिया मीना का जिन्होंने साल के पहले दिन टास्क फोर्स समिति के अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन करते हुए एक नियोजक द्वारा बाल श्रमिक के पाते ही नियमानुसार अधिनियम का उल्लंघन परकार्यवाही कराते हुए 5,000 रुपए का अर्थदण्ड अधिरोपित कर एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया ।
हमारे आपके आसपास आर्थिक तंगी झेलते अनेक परिवार देखे जा सकते है जिसमें अधिकतर बच्चों के सिर पर घर की जिम्मेदारी आने पर उन्हें अपने जीवन की सुरक्षा को दाव पर लगाकर मजदूरी करनी होती है ताकि घर का चूल्हा जल सके । कुछ काम धाम सार्वजनिक तौर पर होते है जिसमें बच्चों को काम करते देखा जा सकता है किन्तु कुछ खतरनाक कामों को खुलेआम न करके छिपा कर किया जाता है जहाँ समाज के व्यक्ति का आना जाना संभव नही होता ऐसे स्थानों पर सीधे तौर पर बच्चों से ही काम लिया जाता है जिसमे अनेक बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को खतरा होने के बाद भी मज़बूरी में कहिये या माफिया द्वारा कैद रखकर ताकत के बल पर काम कराकर लाभ अर्जित कर बच्चों को सभी तरह से शोषण चलता है जहा किसी जिले के श्रम विभाग ने कार्यवाही की हो, ऐसा आजादी के बाद तो इस जिले में देखने को नहीं आया, हाँ सालों में कभी कभार एक दो छुटपुट मामले आये है लेकिन फिर भी वही ढ़ाक के तीन पात की स्थिति कायम रहती हैं। आज समाज में लोगों की संवेदनाये मृत होने से नाते रिश्ते टूट रहे है और घर परिवार के बच्चों पर मानवाधिकार आयोग सहित सभी आयोगों ने आँखे बंद कर ली है, जिसके दुष्परिणामों से अंजान बना बच्चा परिवार सहित सभी की उपेक्षा सहते हालातों से समझौता कर श्रमिक बनने को विवश है, अगर ज्यादा ही प्रताड़ना हो तो वह अपराध जगत में प्रवेश करने को विवश होता है|
बाल श्रम की पहचान एवं विमुक्ति की कार्यवाही के उद्देश्य से गुरुवार को शोभापुर स्थित ढाबा-होटल एवं अन्य व्यावसायिक संस्थानों में संयुक्त जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान श्रम विभाग के नेतृत्व में पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के सहयोग से संचालित किया गया। अभियान के दौरान संस्थानों में बाल श्रम रोकथाम संबंधी स्टीकर लगाए गए तथा नियोजकों को बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। निरीक्षण के समय यह स्पष्ट किया गया कि 14 वर्ष तक के बालकों का किसी भी प्रकार के कार्यों में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। साथ ही 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक श्रेणी के कार्यों—जैसे खाने, ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटकों एवं अन्य परिसंकटमय प्रक्रियाओं—में नियोजन करना कानूनन अपराध है। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि बालक के किसी भी संस्थान में नियोजन एवं किशोर श्रमिकों का खतरनाक उद्योगों में नियोजन संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। उल्लंघन पाए जाने पर दोषी नियोजक को न्यूनतम 6 माह से अधिकतम 2 वर्ष तक का कारावास अथवा न्यूनतम 20,000 से अधिकतम 50,000 तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जाने का प्रावधान है।
नए साल के मौके पर सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती रजनी मालवीय ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत नियेजक कल्लू दुनगे पिता श्री सुदरलाल दुनगे के संसथान पर श्रम निरीक्षक सुश्री सरिता साहू को निरीक्षण के दौरान किशोर श्रमिक कार्यरत पाया गया। निरीक्षण के दौरान नियोजक कल्लू दुनगे, पिता सुदरलाल दुनगे द्वारा किशोर श्रमिक को कार्य पर नियोजित किया जाना पाया गया, जो कि अधिनियम का उल्लंघन है। नियोजक द्वारा आरोपित अर्थदण्ड की राशि का डिमांड ड्राफ्ट कार्यालय में जमा कर दिया गया है। नियमानुसार उक्त राशि किशोर श्रमिक के नाम पर सावधि जमा (एफ.डी.) के रूप में जमा की जाएगी।
