
नर्मदापुरम 15 फ़रवरी2026 (हिन्द संतरी) नर्मदापुरम जिले के इटारसी तहसील मुख्यालय के सुदूर पहाड़ी में ग्राम जमानी में स्थित प्राचीन तिलक सिंदूर मंदिर एक अनूठा धार्मिक स्थल है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जहाँ भगवान शिव को सिंदूर चढ़ाया जाता है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अनूठी परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर सदियों पुराना माना जाता है। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ भगवान शिव को जल, दूध या बेलपत्र के स्थान पर सिंदूर चढ़ाया जाता है। तिलक सिंदूर मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्रतिवर्ष तिलक सिंदूर क्षेत्र में मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रति वर्षानुसार तिलक सिंदूर मेले का स्थानीय प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मंदिर प्रांगण में झंडा चढ़ा कर शुभारंभ किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए मेले में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की गई। मेले में विभिन्न दुकान आवंटित की गई। मेले में अन्य प्रकार की गतिविधियां जैसे रामसत्ता भजन, यज्ञ इत्यादि का भी आयोजन किया गया। मेले में वाहन पार्किंग के लिए दोपहिया, चार पहिया वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई, जिसमें लगभग 5000 दो पहिया वाहन एवं लगभग 1000 चार पहिया वाहन खड़े करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। जिला खाद्य एवं सुरक्षा टीम ने भी मेले में खाद्य सामग्री की दुकानों का निरीक्षण कर सतत रूप से निगरानी की। मेले में पेयजल आदि की भी व्यवस्था की गई। मेला परिसर में पूर्ण रूप से स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी की गई एवं मेले की सुरक्षा एवं निगरानी के लिए पूर्ण मेले में सीसीटीवी कैमरा भी स्थापित किए गए। इटारसी में लगने वाले तिलक सिंदूर मेले के दौरान पूरे प्रशासनिक अमले द्वारा मेले पर निरंतर निगरानी रखी गई। तिलक सिंदूर मेले के दौरान अपर कलेक्टर श्री राजीव रंजन पांडे एवं एसडीएम श्री निलेश शर्मा मंदिर परिसर में मौजूद रहकर सभी इंतजामों की सतत मॉनिटरिंग करते रहे।
प्राकृतिक सुंदरता एवं हरियाली से लबरेज बाबा शरद देव का प्राचीन मंदिर

इटारसी शहर से मात्र 30 मिनट की दूरी पर स्थित शरद देव बाबा का मंदिर, जंगल के बीच एक पहाड़ी पर बसा हुआ है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ स्थापित प्राचीन शिवलिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस वर्ष भी मंदिर पर पहुंचकर कई श्रद्धालुओं ने बाबा शरद देव के दर्शन किए। यह मंदिर जिले के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। यहाँ स्थापित शिवलिंग कई वर्ष पूर्व खुदाई के दौरान मिला था। शरद देव बाबा का मंदिर हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ का शांत वातावरण और प्राकृतिक दृश्य श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभव प्रदान करते हैं। यह मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं।
