नर्मदापुरम 26,मार्च,2026(हिन्द संतरी) जिला सहकारी बैंक की प्रशासक पदेन कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना विगत दो माह से विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ अन्य मुद्दों के साथ समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की मानीटरिंग में समितियों के हित संवर्धन में चूक का परिणाम समितियों के समक्ष गेहूं उपार्जन उपरांत समय पर परिवहन न होने से अनुबंध का पालन न कराने वाले शासन के उपार्जन एजेसी अधिकारियों के पक्ष में ओर समिति कर्मचारिओ के विरूद्ध सारे निर्णय लेकर उन्हे गबन धोखाधड़ी, आर्थिक अनियमिताओं का आरोपी बनाकर उन्हे चोर साबित करने में लगी है यह बात वे कभी अपनी बैठकों में समिति कर्मचारियों के समक्ष क्यों मानिटरिंग नहीं कराती है, यह संभवतया अधिकारिओ का पक्ष लेने ओर छोटे कर्मचारियों को कुचलने जैसा नही तो ओर क्या है?
कलेक्टर की बैठको में वे सारे अधिकारी मौजूद होते है जो खरीदी के दौरान केन्द्रों पर अपना रुआब झाड़ते है किन्तु समिति कर्मचारियों के समस्या या परेशानी को दूर करने में जरा भी मानवीयता नही दिखाते है,कांटा मशीन रिपेयरिंग कर्मचारी, चौकीदार-हम्माल आदि के वेतन सहित स्टेशनरी तिरपाल आदि अन्य खर्चों के चक्रव्यूह में फंसा हुआ हर समिति प्रबन्धक खरीदी में लाखों नहीं करोड़ो रुपए का आरोपी बनने को विवश होता है ओर उसके बाद पंजीयक, सयुक्त पंजीयक, ट्रिवूनल सहित कलेक्टर के समक्ष आर्बिटेशन के मामलों की पेशी झेलते हुये समय ओर पैसा बर्बाद करने को विवश है।
कलेक्टर पिछले एक माह से होने वाली समयसीमा के बैठको सहित अन्य बैठको में अपने अधिकारियों को आगामी गेहूं उपार्जन को लेकर सभी उपार्जन केंद्रों पर निर्धारित तिथि से पूर्व आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश तो जारी कर देते है किन्तु क्या समिति प्रबन्धकों कि मूलभूत आवश्यकताओं एव उनकी तकलीफ़ों-कठिनाइयों फ भी ध्यान क्यों नही दिया जाता है की खरीदी करने वाली संस्था के पास इस हेतु जिला सहकारी बैंक, सिविल सप्लाई, आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग ने कितनी राशि की व्यवस्था कर रही है, अगर राशि की व्यवस्था नही है तो समिति प्रबन्धक उक्त राशि की व्यवस्था कहाँ से जुटा रहा है।
कलेक्टर कृषि अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के परामर्श से समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र निर्धारित करते है ओर उन्हे नर्मदापुरम जिले में कहाँ गोदाम अथवा मैदान में खरीदी करवाना है यह निर्देश जारी किए जाते है। जिन स्थानों पर गोदाम न हो या लंबी दूरी पर हो उन समितियों से गोदाम में खरीदी न कराकर खुले मैदान में केंद्र बनाया जाता है लेकिन बाबई से लेकर उमरधा तक की समितियों को अधिकांश खुले मैदान में केंद्र देना संस्था के साथ अन्याय करना है जबकि उन्हे केंद गोदामों में दिये जाना चाहिए वही दूसरी ओर नर्मदापुरम-इटारसी से सिवनी शिवपुर तक की समितियों को गोदाम के अंदर खरीदी करने की सुविधा है, यह भेदभाव को बैठको में दूर कर किसानों के साथ बैठक कर गोदामों में खरीदी कि व्यवस्था होनी चाहिए ताकि नुकसान से बचा जा सके।
कलेक्टर को चाहिए कि वे वेयर हाउसनिर्धारण गाइड लाइन 26.95 रुपए प्रति क्विंटल सम्पूर्ण उपार्जन कार्य खर्च विभाग से मिलने के दौरान किए जाने वाले वास्तविक खर्च समिति को दिलवाए ओर वेयर हाउस मे खरीदी कि स्थिति में o पॉइंट खरीदी के नाम से पूर्ण भुगतान न कर 12 रुपए प्रति क्विंटल तुलाई। 5 रुपए प्रति क्विंटल टैक्टर में लदान ,4 रूपये क्विंटल टैक्टर भाड़ा, 11 रूपये क्विंटल स्टेकिंग 2.25 प्रति क्विंटल रंग धागा टैग हम्माल के द्वारा ली जानी वाली मजदूरी के हिसाब से समितीओ को लेबर व्यय का पैकेज सरकार से दिलाये, साथ ही अनेक जगह हम्माल प्रतिदिन मजदूरी के बाद भुगतान कि मांग करते है जो समिति द्वारा किया जाना संभव नहीं, वही सबसे बड़ी समस्या हम्माल 12 रुपए क्विंटल में तुलाई करता है, बाहर खरीदी होने पर ढुलाई हेतु ट्रेक्टर को 5-6 रूपये क्विंटल भाड़ा, 4-5 रुपए क्विंटल ट्रेक्टर कि लोडिंग का भुगतान करना होता है जिसे विभाग नहीं करता है। स्टेकिंग के लिए समितियों को 5 रुप्ये क्विंटल दिया जाता है जबकि खर्च 11 -12 रुपए क्विंटल होने से समिति प्रबन्धकों को खर्च न मिलने से बाजार से कर्ज लेकर जेब से खर्च करने को विवश होते हुये अपनी नौकरी बचाने कि समस्या होती है।
कलेक्टर या उनके अधिकृत जिम्मेदार अधिकारी खरीदी से पूर्व केंद्र बनाने से पहले शासन के निर्देश कि उन खुले मैदान खेत जो वेयर हाउस परिसर से लगे हैं वहां खरीदी न कि जाये का पालन कराकर समितियों को उन स्थानों पर खरीदी हेतु विवश करना अनुचित है जिसपर अंकुश लगना चाहिए। वे अधिकारीगण जिन्हें समिति में दायित्व दिया है वंहा खरीदी से पूर्व परिवहन जैसे खर्चों से बचने के लिए मैदानों की बजाय गोदामों मे खरीदी का पक्ष नही रखता है, तब कि स्थिति में नुकसान के लिए उन्हे भी आरोपी बनाया जाना चाहिए जिस प्रकार समिति प्रबन्धक बनाए जाते है। जो समितियों खुले मैदान में खरीदी को विवश हो अधिक गर्मी में समय पर परिवहन न हो पाने पर सुखत आने पर गोदामों में जमा न करने के नुकसान सहित बरसात कि स्थिति में गेहूं को मैदान मे सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल आदि कि व्यवस्था न हो पाने, दीमक चूहों से हानि समय पर लेबर भुगतान नहीं और एक से अधिक केंद्र बारिश से बचाव की जिम्मेदारी सहित सारी जवाबदारी समिति प्रबंधक पर थोप कर आरोपी बना दिया जाता है, उसमें नोडल अधिकारियों को भी शामिल किया जाये ताकि वे गाइड लाइन का पालन कराने को विवश हो जाये जिससे समिति प्रबन्धक सभी ओर से सुरक्षित हो सके।
