
नर्मदापुरम 10,दिसम्बर,2025(हिन्द संतरी) परिसमापन में आई रसूलिया स्थित ग्राम सुधार सहकारी समिति फौजदार पेट्रोल पम्प के सामने नर्मदापुरम की करोड़ों रूपये की नेशनल हाइवे सड़क पर सटी भूमि भाजपा नेता एव उसके रिश्तेदारों ने जबरिया कब्ज़ा कर एक भव्य आलीशान शोरुम बना लिए किन्तु सहकारिता के अधिकारीयों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी और लगातार 7 सालों से शिकायत करते हुए उक्त समिति के संस्थापक सदस्य रामदास पटेल की मृत्यु हो गई और उक्त को न्याय नही मिल सका. उसके बाद इस समिति के पूर्व सदस्य मेघश्याम पटेल, राकेश फौजदार,सहित अनेक मौजूद सदस्यों ने समिति को पुनः जीवित कराने को लिखा तब संस्था की परिसमापन सहकारी निरीक्षक कंचन सोनी ने कार्यवाही शुरू कर बैठक हेतु एजेंडा जारी कर प्रेस नोट जारी किये किन्तु वे चुनाव से मुकर गई उसके बाद आज तक चुनाव नही हुए,परिणाम स्वरूप आज भी इस परिसमापक समिति की भूमि पर अवैध कब्ज़ा और पूर्व भवन की सम्पत्ति चोरी जा रही है पर सुरक्षा हेतु तार लगाने के लिए वजट न होने का रोना रोकर सहकारी निरीक्षक कंचन सोनी ने उक्त समिति की भूमि पर कब्ज़ा करने की खुली छुट दे रखी है, आज जिले में जितनी भी समितियों परिसमापन में है उनकी सम्पति, भवन, गोदाम आदि नेताओं के कब्जे में है।
आश्चर्य होता है कि नियमानुसार उप पंजीयक सहकारी संस्थाएँ, नर्मदापुरम सहकारी नियम 1960 की धारा 69(1) के तहत 10 सहकारी समितियों को परिसमापन में लाने का आदेश का पालन कर समितियों को परिसमापन में लाकर अपने अधीनस्थों को परिसमापक बनाकर सौंप देता है जैसे हाल ही में 05 दिसम्बर 2025 को धारा 70(1) के अनुसार, सहकारी निरीक्षक कंचन सोनी को इन संस्थाओं का परिसमापक नियुक्त किया गया है। सवाल उठता है कि उक्त परिसमापक समितियों के पुनः जीवित करने में विभाग पूर्व सदस्यों आदि की मृत्यु के बाद नए सदस्य क्यों स्वीकार नहीं करता है जबकि पूर्व सदस्य उनकी अनुशंसा कर समितियों को परिसमापन से बाहर लाने का प्रयास करते है पर विभाग नियमों का चाबुक लेकर बाधक बना होता है, लेकिन जहा अपने ही अधिकारी या मिलने वाले हो उनपर यह चाबुक नहीं चलता है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण एडवोकेट रामराजसिंह ठाकुर द्वारा आदर्श गृह निर्माण समिति के संचालन न करने के बाद सदस्यता शुल्क वापिस ले जाते है तब विभाग के अधिकारी इस संस्था के सदस्य बन जीवित करते है, जो अधिकांश सदस्यों के मृत्यु के बाद परिसमापन में चली जाती है तब उक्त कार्यालय के प्रमुख रहे उपायुक्त बीएस परते सेवानिर्वृति के बाद किस नियम कानून से पुनः जीवित कर क़ानूनी अधिकार पा जाते है, इसका जबाव आला अधिकारी देने में कतराते है|
उपायुक्त शिवम् सोनी ने हाल ही में जो समितियों को परिसमापन में लाये है वे पंडित दीनदयाल परिवहन सहकारी संस्था होशंगाबाद, शुभम साख सहकारी संस्था रोहना, हरि प्रेम बीज एवं कृषि आदान सहकारी संस्था कलकुही, जागृति जैविक खाद उत्पादक एवं कय विक्रय सहकारी समिति रजौन, जयभोले मत्स्याद्योग सहकारी समिति सकपुरगोदा, माँ रेवा उन्नत बीज एवं कृषि आदान सहकारी संस्था सांगाखेडाकला, तिलहन उत्पादक सहकारी समिति बुधवाडा, माँ नर्मदा प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भण्डार बाबई, तिलहन उत्पादक सहकारी संस्था ठैनी एवं माँ नर्मदा महिला बहुउद्देशीय सहकारी समिति चौराहट शामिल है।
उपयुक्त कार्यालय ने परिसमापक में आई समितियों के सभी दावेदारों को सूचित किया है कि वे अपने दावों को इस सूचना के प्रकाशन से दो माह के भीतर प्रमाण सहित लिखित रूप में परिसमापक को प्रस्तुत करें, जबकि होना चाहिए की समितियों के कार्यक्षेत्र में उक्त प्रकार की सूचना मुनादी देने से समितियों के मान्य जीवित सदस्य समयइमा में दावा कर सके जो जानकारी के आभाव में इससे वंचित होने पर सभी दायित्व स्वयमेव परिसमापक के पास पहुँच जायेंगे और परिसमापक के पास इन समितियों की सम्पत्ति को कब्जाने आदि के महारत लोग डेरा डाल अपना स्वार्थ सिद्ध करने में सफल होंगे ।
