नर्मदापुरम 28,मार्च,2026 (हिन्द संतरी) श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग, म.प्र. शासन द्वारा श्रीरामनवमी के पावन पर्व पर कला नुशासनों में श्रीरामचंद्र की महिमा केन्द्रित’ आविर्भाव समारोह का आयोजन 27 मार्च, 2026 को सायं 6:30 बजे से श्रीराम मंदिर, माच्छा में किया गया। संस्कृति विभाग द्वारा यह आयोजन जिला प्रशासन, नर्मदापुरम् के सहयोग से किया गया, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और शास्त्रीय-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के अनुपम संगम ने दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह में श्री राकेश सिंह एवं साथी, हरदा का निमाड़ी लोक गायन, भोपाल की सुश्री प्रीति तिवारी एवं साथी कलाकारों द्वारा कथक एवं भरतनाट्यम नृत् य शैली में श्रीराम केन्द्रित नृत् यनाटिका” श्रीरामचरितम् की प्रस् तुति एवं धार की सुश्री श् वेता गुंजन जोशी द्वारा श्रीराम केन्द्रित भजन गायन की प्रस्तुति दी गई।
सर्वप्रथम राकेश सिंह म्हारा कीर्तन में रस बरसाओ… गीत से प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके पश्चात रट ले मनवा शाम सबेरे…, सब देव में देव हजारों है… शिव बम बम भोला…. रंग रंगीली चुनर ओढ़ के.., कैंचन कांच का बनया रे धनियर…. श्रीराम भगवान का… आदि लोकगीतों की प्रस्तुति दी। भक्ति के इस कारंवा को आगे बढ़ाते हुए सुश्री प्रीति तिवारी एवं साथी कलाकारोंने नृत्य नाटिका श्रीरामचरितम्” की प्रस्तुति दी। यह नृत्य नाटिका भारतीय शास्त्रीय नृत्य की दो प्रमुख विधाओं कथक एवं भरतनाट्यम के समन्वय से श्रीराम के जीवन की पावन कथा का मंचन है।
पहली प्रस्तुति गणेश वंदना की हुई। तीन ताल निबद्ध इस रचना में शुद्ध कथक शैली के माध्यम से दिखाया गया कि श्रीगणेश समस्त विघ्नों का नाश करते हैं। दूसरी प्रस्तुति भगवान विष्णु की स्तुति एवं श्रीराम अवतार पर केंद्रित थी। ताल चतुस्तर एकम् में निबद्ध इस रचना में दिखाया गया कि प्रभु श्रीराम विष्णुजी के अवतार हैं। इसके पश्चात श्रीराम के जन्म की पावन गाथा प्रस्तुत की गई। अगले दृश्य में ठुमक चलत रामचंद्र… गीत पर श्रीराम का बाल्यकाल दिखाया गया। ताल रूपक में निबद्ध इस रचना में उनकी बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। अगले दृश्य में श्रीराम एवं लक्ष्मण का गुरुकुल जाकर शिक्षा ग्रहण करना दर्शाया गया तो आदि ताल में निबद्ध रचना के माध्यम से जनकपुरी आगमन एवं सीता स्वयंवर दर्शाया गया। ताल कहरवा में निबद्ध रचना के माध्यम से श्रीराम का वनवास एवं हनुमान मिलन का भावपूर्ण भक्ति चित्रण पेश किया गया। रात कहरवा में निबद्ध रावण वध के दृश्य के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय को दशति हुए रावण वध का प्रभावशाली मंचन किया गया तो ताल दीपचंदी के माध्यम से श्रीराम के अयोध्या आगमन एवं राज्याभिषेक के दृश्यों का मंचन हुआ।
अंतिम प्रस्तुति सुश्री शेवता गुंजन जोशी के भक्ति गायन की हुई। श्वेता ने अपनी प्रस्तुति का आगाज श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन… भजन से किया। इसके पश्चात हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की…, भये प्रकट कृपाला दीन दयाला…. भजमन राम चरण सुखदाई… कुटुंब तजि शरन, राम तेरी आयो… एवं रामा रामा रटते रहते… गीत से अपनी वाणी को विराम दिया।
