भोपाल। भोपाल में बढ़ते वायु प्रदूषण और धूल के गुबार को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। बेंच ने कहा कि पुराने आदेशों पर कोई रिपोर्ट फाइल न होना खेदजनक है और यह लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।सात जनवरी के निर्देशों का पालन न करने पर दोनों अधिकारियों को दो हफ्ते में जवाब देना होगा, वरना उन्हें कोर्ट में सशरीर पेश होना पड़ेगा।
एनजीटी ने केंद्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के पांच साल के फंड और उसके खर्च का विवरण मांगा है। भोपाल सिटीजन्स फोरम द्वारा दायर याचिका में राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण, सड़कों पर उड़ती धूल और एक्यूआई मानिटरिंग स्टेशनों पर पानी का छिड़काव न होने की बात उठाई गई थी।
सात जनवरी को एनजीटी ने निर्देश दिए थे कि एक्यूआई स्टेशनों पर पानी का छिड़काव किया जाए और वास्तविक डेटा प्रस्तुत किया जाए। लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। अब ट्रिब्यूनल ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर से दो हफ्ते में जवाब मांगा है, अन्यथा उन्हें कोर्ट में सशरीर पेश होना होगा।
इस कदम से राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
