इंदौर! के कनाड़िया रोड पर नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई बुधवार को विवाद में बदल गई। सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कुछ लोग नाराज होकर निगम के सहायक रिमूवल अधिकारी अश्विन कल्याणे पर टूट पड़े और उन्हें पीट दिया। घटना के बाद माहौल अत्यंत तनावपूर्ण हो गया और निगम टीम को बिना पुलिस सुरक्षा कार्रवाई रोकनी पड़ी। बाद में कनाड़िया थाना जाकर FIR दर्ज करवाई गई।
नगर निगम ने बुधवार को कनाड़िया रोड और बंगाली चौराहा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया। इस दौरान सुबह आयुक्त दिलीप कुमार यादव इलाके का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने देखा कि सड़क किनारे अस्थायी दुकानों, गुमटियों और अन्य कब्जों से मार्ग जाम हो रहा है। उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए और निगम का रिमूवल अमला मौके पर पहुंच गया।
कार्रवाई की शुरुआत बंगाली चौराहा से हुई। निगम की टीम ने सड़क किनारे लगी सब्जी-फल की दुकानों और गुमटियों को हटाना शुरू किया। इसी दौरान सेवंथ डे स्कूल के सामने लगी एक गजक की दुकान को हटाने का प्रयास किया गया। दुकानदारों में गुस्सा भड़क गया और देखते ही देखते गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई। गजक दुकान से जुड़े कुछ लोग सहायक रिमूवल अधिकारी अश्विन कल्याणे को घेरकर पीटने लगे। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और निगम अमले को कार्रवाई रोकनी पड़ी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे अमले के साथ कनाड़िया थाना पहुंचे। रिमूवल अधिकारी अश्विन कल्याणे की शिकायत पर पुलिस ने गजक दुकान के संचालक राकेश जोशी और उदय जोशी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुँचाने और मारपीट के आरोप में FIR दर्ज की। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 132, 121, 296 सहित अन्य धाराएँ शामिल की गई हैं।
दोपहर बाद निगम टीम को पुलिस सुरक्षा के साथ पुनः अभियान शुरू करने के लिए क्षेत्र में भेजा गया। शाम तक अभियान जारी रहा। इस दौरान सड़क के दोनों ओर 50 से अधिक अस्थायी दुकानें, ठेले और गुमटियां हटाई गईं। निगम टीम ने बंगाली चौराहा–होलकर प्रतिमा से लेकर बायपास चौराहे तक सड़क किनारे से कुल दस ट्रक सामान जब्त किया।
अभियान के दौरान कई दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उनसे अस्थायी दुकान लगाने के बदले अवैध वसूली की जाती है। दुकानदारों का कहना था कि क्षेत्र में ‘पटेल’ नामक व्यक्ति हर दुकानदार से हजारों रुपये प्रतिमाह वसूलता है और दावा करता है कि इसमें निगम और कुछ स्थानीय नेताओं का हिस्सा भी शामिल है। हालांकि दुकानदार किसी प्रकार का रसीद या प्रमाण नहीं दिखा पाए। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में दुकानें लगाई जा रही थीं, उनका बड़ा हिस्सा नजूल की श्रेणी में आता है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी। सड़क पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे अतिक्रमण दोबारा नहीं होने दिए जाएंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों को मुक्त करना है, ताकि लोगों को यातायात और आवागमन में कोई समस्या न हो।
इस अभियान ने क्षेत्र में हलचल मचा दी। हालांकि पहले हुई हिंसा के बाद पुलिस सुरक्षा और कड़ी निगरानी के चलते स्थिति नियंत्रित रही। नगर निगम ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कार्रवाई के दौरान विरोध करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इंदौर की जनता और दुकानदारों के लिए यह अभियान एक संदेश है कि कानून और नियम का पालन अनिवार्य है, और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
