जगदीश का औषधीय खजाना सवा सौ पौधों की पहचान
प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि जगदीश प्रसाद अहिरवार ने अपने वन सेवा कार्यकाल के दौरान केवल ड्यूटी ही नहीं की बल्कि जंगलों को एक चलती-फिरती ‘किताब’ की तरह पढ़ा। अद्भुत संकलन जगदीश ने पन्ना के जंगलों में पाए जाने वाले 125 सवा सौ से अधिक औषधीय पौधों की पहचान की। विस्तृत शोध उन्होंने इन पौधों के केवल नाम ही नहीं जुटाए, बल्कि उनके वैज्ञानिक नाम, स्थानीय उपयोग, औषधीय गुण और पारंपरिक उपचार पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया। जमीनी मेहनत: यह कार्य किसी लैब में नहीं, बल्कि वर्षों तक जंगल की पगडंडियों पर चलने, स्थानीय जानकारों से संवाद करने और निरंतर अवलोकन करने का परिणाम है।
पीएम मोदी ने क्यों की तारीफ
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जगदीश जैसे कर्मठ लोग हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और जैव-विविधता के संरक्षण के असली प्रहरी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा जगदीश प्रसाद जी ने जंगलों की जिस संपदा को दस्तावेजों में सहेजा है, वह हमारी आने वाली पीढ़ियों और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं के लिए बहुत कीमती है।
वनकर्मियों के योगदान को मिली नई पहचान
अक्सर बीट गार्ड जैसे निचले स्तर के कर्मचारी गुमनामी में रहकर जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं। जगदीश अहिरवार का उल्लेख होने से पूरे देश के वनकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। पन्ना के अधिकारियों के अनुसार, जगदीश का यह ज्ञान अब स्थानीय स्तर पर लोगों को जड़ी-बूटियों के प्रति जागरूक करने में काम आ रहा है।
