इससे पहले यह मामला सीबीआइ और एसीबी द्वारा दर्ज किया गया था। दिसंबर 2020 में सीबीआइ ने आरोपपत्र दाखिल कर लिया था। जांच में पता चला कि वर्ष 2016-17 के दौरान अशोक कुमार सोनी, जीरापुर उप डाकघर में उप डाकघर मास्टर के पद पर तैनात था।
दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच उसने संचय पोस्ट साफ्टवेयर का उपयोग करके 138 डाक बचत बैंक खातों में पिछली तारीखों की फर्जी जमा प्रविष्टियां कीं। इसके जरिए उसने बिना किसी वास्तविक जमा के खातों की शेष राशि बढ़ा दी। इसके बाद फर्जी खाते और संचय पोस्ट से फिनाकल सिस्टम में स्थानांतरण करके उसने कुल 1,23,31,180 रुपये निकाल लिए।घोटाले का पता तब चला जब अशोक कुमार सोनी ने नवंबर और दिसंबर 2017 के दौरान 1,24,44,800 रुपये नकद जमा किए। इस धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर सीबीआइ ने केस दर्ज किया और बाद में मामला ईडी के पास पहुंचा।
ईडी ने आरोप लगाया कि यह धोखाधड़ी और फर्जी प्रविष्टियों का मामला गंभीर है और आरोपी को न्यायालय में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जांच में यह भी पता चला कि अशोक कुमार सोनी ने खाताधारकों की जानकारी का दुरुपयोग कर राशि का गबन किया।इस घोटाले के मामले में ईडी की कार्रवाई और कोर्ट में शिकायत दर्ज होने के बाद अब इस मामले पर न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि धोखाधड़ी की राशि की वापसी और आरोपी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
