ठग ने बातचीत के दौरान महिला का विश्वास जीतने के लिए मकान का किराया 9 हजार रुपये तय किया और बिना किसी आना-कानी के दो महीने का एडवांस किराया देने पर भी सहमति जता दी। जब भरोसा पूरी तरह कायम हो गया, तो शातिर ठग ने भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बहाने महिला से उनके बैंक खाते का विवरण मांग लिया। जैसे ही महिला ने अपना बैंक अकाउंट नंबर साझा किया, उनके मोबाइल पर धड़ाधड़ मैसेज आने शुरू हो गए। आरोपी ने एक के बाद एक तीन किस्तों में महिला के खाते से कुल 93,888 रुपये पार कर दिए। पहली बार में 27 हजार, फिर 26,999 और अंत में 39,889 रुपये कटते ही महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई।
ठगी का अहसास होते ही पीड़िता ने बिना देर किए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री व मोबाइल नंबर के आधार पर उसकी तलाश शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों “आर्मी ऑफिसर” बनकर ठगी करना अपराधियों का एक प्रचलित तरीका बन गया है, क्योंकि लोग सेना के नाम पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक विवरण, ओटीपी या पिन साझा न करें, चाहे वह खुद को किसी भी बड़े पद का अधिकारी क्यों न बताए।
