शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे तक पूरा शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपटा रहा। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। पिछले आठ दिनों से सुबह देर तक और शाम को जल्दी घना कोहरा छा रहा है। दृश्यता घटकर 60 से 100 मीटर रह गई, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।
मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 11.1 डिग्री कम रहने के कारण दिन को ‘कोल्ड सीवियर डे’ घोषित किया गया। इससे पहले साल 2019 में अधिकतम तापमान 8.3 डिग्री तक गिरा था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही जेट स्ट्रीम हवाओं के कारण घना कोहरा बना हुआ है। वहीं कश्मीर की ओर से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही बर्फीली हवाएं हिमालय की बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक ला रही हैं, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई है।
ठंड से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव जलवाए हैं, ताकि राहगीरों और बेसहारा लोगों व जानवरों को कुछ राहत मिल सके।
कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्वालियर आने वाली कई ट्रेनें 5 से 6 घंटे तक देरी से चल रही हैं। दिल्ली से आने वाली पंजाब मेल करीब 4 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस लगभग 2 घंटे और मंगला एक्सप्रेस करीब 5 घंटे लेट रही। वहीं भोपाल से आने वाली मंगला एक्सप्रेस भी साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंची, जबकि केरल और समता एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से काफी देर से चल रही हैं।
हवाई यातायात पर भी कोहरे का असर पड़ा है। ग्वालियर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स 2 से 3 घंटे तक देरी से संचालित हो रही हैं। गुरुवार को इंडिगो की मुंबई और दिल्ली फ्लाइट्स और एयर इंडिया की बेंगलुरु फ्लाइट कोहरे के कारण देर से आईं और रवाना हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर ग्वालियर में ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है और आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
