जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक हैरान करने वाली साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है जिसमें एक रिटायर्ड बिजली विभाग के अधिकारी को ठगों ने पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और टेरर फंडिंग के झूठे आरोप में उन्हें धमकाकर 31 लाख रुपये ठग लिए। यह घटना यह दिखाती है कि साइबर ठगी की दुनिया में अपराधी कितने चालाक हो गए हैं और कैसे वे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
घटना का विवरण
नेपियर टाउन निवासी अविनाश चंद्र दीवान जो बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हैं को पहले एक फोन कॉल आया। इस कॉल में ठग ने खुद को एटीएस टेररिज्म स्क्वाड का अधिकारी बताते हुए अविनाश दीवान को आतंकवादियों के साथ संबंध होने और टेरर फंडिंग में लिप्त होने का आरोप लगाया। ठग ने उन्हें धमकी दी कि उनकी संपत्ति सीज कर दी जाएगी और वे किसी गंभीर कानूनी संकट में फंसने वाले हैं।
इस प्रकार ठग ने अधिकारी को मानसिक दबाव में डाल दिया और उन्हें डराया धमकाया कि यदि उन्होंने जो कहा जा रहा है उसे गंभीरता से नहीं लिया तो उनकी सारी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। इस डर के कारण अविनाश चंद्र दीवान ने लगातार पांच दिनों तक ठग के साथ संपर्क बनाए रखा और कुल 31 लाख रुपये की राशि उन्हें ट्रांसफर कर दी।
साइबर धोखाधड़ी का खुलासा
अविनाश चंद्र दीवान के बेटे को जब इस पूरे घटनाक्रम का पता चला तो उन्होंने पिता से पूछताछ की और पाया कि उनके साथ साइबर धोखाधड़ी हुई है। बेटे ने समझाया कि यह किसी तरह की धोखाधड़ी है जिसके बाद उन्होंने पिता को मदन महल थाने भेजकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अविनाश दीवान के द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने धोखाधड़ी में उपयोग किए गए फोन और बैंक खाते के विवरण के आधार पर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। साइबर अपराधी अब इतने चतुर हो गए हैं कि वे किसी भी व्यक्ति को आसानी से अपने झांसे में ले सकते हैं खासकर जब वह व्यक्ति किसी प्रकार के डर और दबाव में हो।
साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएँ
यह घटना साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को उजागर करती है जिसमें ठग अब विभिन्न तरह के डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके लोगों को ठगने की योजना बनाते हैं। कुछ सालों में साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है और अपराधी अब तकनीकी रूप से काफी विकसित हो चुके हैं। वे कॉल ईमेल और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए लोगों को झांसा देने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस तरह की घटनाओं में लोग खासकर बुजुर्ग साइबर ठगों के शिकार हो जाते हैं क्योंकि वे तकनीकी मामलों में निपुण नहीं होते और आसानी से डर या भ्रमित हो जाते हैं। इस मामले में भी अविनाश दीवान एक वरिष्ठ नागरिक हैं और साइबर ठगों के धूर्त प्रयासों से उन्हें धोखा हो गया।
पुलिस की कार्रवाई और जागरूकता की आवश्यकता
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है लेकिन यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों को ज्यादा सतर्क रहना जरूरी है। विशेष रूप से बुजुर्गों और तकनीकी रूप से अनजान लोगों को ऐसे धोखाधड़ी के मामलों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
इसके अलावा साइबर अपराधी अब इतनी तकनीकी तरकीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं कि उन्हें पकड़ना और सजा दिलवाना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है। ऐसे में नागरिकों को किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश के प्रति सावधान रहना चाहिए और तुरंत इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।
यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर ठग अब सिर्फ व्यक्तिगत जानकारी या पैसे ही नहीं बल्कि मानसिक दबाव और डर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में न केवल पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ जाती है बल्कि समाज में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। लोग इस प्रकार के ठगी से बचने के लिए अधिक सतर्कता अपनाएं और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से बचें।
