जानकारी के अनुसार संत दादा गुरु आज सुबह उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए। मंदिर पहुंचने पर उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया और प्रदेश व देश की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और साधु संतों ने भी संत दादा गुरु का स्वागत किया।
बताया गया है कि संत दादा गुरु पिछले पांच वर्षों से मां नर्मदा की परिक्रमा पैदल कर रहे हैं। नर्मदा परिक्रमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और कठिन धार्मिक साधना मानी जाती है जिसमें श्रद्धालु मां नर्मदा के उद्गम से लेकर संगम तक की यात्रा कर पुनः उसी मार्ग से वापस लौटते हैं। इस पूरी यात्रा में साधक को अनेक कठिनाइयों और प्राकृतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है लेकिन श्रद्धा और आस्था के बल पर साधक इस तपस्या को पूर्ण करते हैं।
संत दादा गुरु की साधना का सबसे विशेष पहलू यह है कि वे पूरी परिक्रमा के दौरान केवल नर्मदा जल पर ही निर्भर रहकर जीवन यापन कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अत्यंत कठिन तपस्या मानी जाती है और इसे साधना संयम और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके इस संकल्प और साधना के कारण श्रद्धालुओं में उनके प्रति गहरा सम्मान देखा जा रहा है।
महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। दधियोदक आरती के समय मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के जयकारों के साथ पूजा अर्चना की। संत दादा गुरु ने भी भगवान महाकाल से देश और समाज में शांति समृद्धि और कल्याण की कामना की।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि नर्मदा परिक्रमा भारतीय सनातन परंपरा की एक महत्वपूर्ण साधना है और इसे पूरा करना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद संत दादा गुरु अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
