मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण और तारा मंडल में लगी विज्ञान प्रदर्शनी का शुभारंभ एवं अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए 4 लेन उज्जैन बायपास और सम्राट विक्रमादित्य – द हेरिटेज परियोजना का भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर विचारक एवं समाजसेवी सुरेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात मास्टर ऑफ टाइम हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने ग्रीनविच भ्रमण के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाओं की सटीकता अद्भुत है। डोंगला को एस्ट्रोनोमिकल स्टडीज के लिए विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन मील का पत्थर सिद्ध होगा। भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था जो अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है। आज समय और स्पेस दोनों को एक दूसरे से समेकित रूप से समझने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आज 15 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमें केंद्र सरकार का भी सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है। वास्तव में यह अपनी वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस नीति की भावना के अनुरूप युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 हमारे लिए उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। हमारा लक्ष्य है की सिंहस्थ 2028 में उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जाने। वर्ष 2028 के सिंहस्थ को व्यवस्थित रूप से संपन्न करना हमारा दायित्व है। इसी उद्देश्य से 700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बायपास रोड का भूमि-पूजन भी हुआ है। इस सौगात के लिए उज्जैनवासी बधाई के पात्र हैं। उज्जैन सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए सर्व-सुविधा संपन्न प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से सभी को वर्ष 2028 के भव्य और दिव्य सिंहस्थ के लिए आमंत्रित किया।
विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट ब्रोशर एवं पुस्तिका का किया विमोचन
सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में 725 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन) सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों एवं सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। साथ ही 4-लेन मार्ग बनने से आवागमन और यातायात प्रबंधन सुगम होगा। मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा।
नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का किया लोकार्पण
महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम विषय पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन
सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप में विद्यार्थियों से चर्चा कर किया उत्साहवर्धन
