
उमरिया 19 जनवरी 2026 ()हिन्द संतरी)सुरेन्द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट /उमरिया जिले में प्रदेश के मुखिया के आदेश, निर्देश नहीं चलते, जिसका उदाहरण देखने को मिला ग्राम बिलासपुर में, एक तरफ तो प्रदेश के मुख्यमंत्री गाय पालकों के लिए लगातार सुविधाएं दे रहे हैं और दूसरी तरफ जिले में 5 – 5 गायों की तड़फ कर मौत हो रही है वहीं अगर देखा जाय तो हमारे समाज में गाय को माता का दर्जा दिया गया है लेकिन यहां तो उलटा ही नजर आ रहा है। मामला है ग्राम बिलासपुर का जहां महुआ की अवैध कच्ची शराब बनाई जा रही है हालांकि यह कोई एक गांव का हाल नहीं है, पूरे जिले में चल रहा है लेकिन ग्राम बिलासपुर में महुआ की कच्ची शराब बनाने के बाद जो लाहन बचा था उसको खुले में फेंक दिया गया और गांव की ही 5 गायों ने उसको खा लिया और तड़फ कर सभी की मौत हो गई, जिससे गांव में हड़कंप मच गया। गौ पालक रोते रह गए, उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
वहीं अगर देखा जाय तो आबकारी विभाग सीधे कलेक्टर के अधीन है और आबकारी विभाग पर या तो कलेक्टर का अंकुश नहीं है या उनकी सहमति है, जिसके चलते गांव – गांव में अवैध शराब बन रही है और बिक रही है, सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब उस कच्ची शराब का लाहन खाने से गायों की मौत हो गई तो उस शराब को पीने से इंसान का क्या हाल होगा। खैर इंसान का जो भी हाल हो लेकिन आबकारी विभाग की जेब तो भर ही रही है, वैसे देखा जाय तो अवैध शराब बनाने और बेचने के जुर्म में पकड़े वही जाते हैं जो अधिकारियों की जेब गरम नहीं करते, और उन्हीं से विभाग का टारगेट भी पूरा हो जाता है तथा आबकारी विभाग उन्हीं को पकड़ कर अपनी पीठ थपथपा लेता है, आए दिन प्रेस नोट जारी करवा कर अपनी बड़ाई बता देता है।
गौरतलब है कि जिले में माफियाओं के आगे कोई भी नियम कानून नहीं चलता है, चाहे वो कोई भी और कैसा भी माफिया हों, शराब माफिया, वन माफिया, भू माफिया या खनिज माफिया हो सभी हिस्सा देकर शांति पूर्वक अपना काम कर रहे हैं, भले ही युवा वर्ग नशे के आगोश में समाये रहते हों, इसी तरह अभी चार दिन पहले ही ग्राम कोयलारी की महिलाओं ने खुद गांव को नशा मुक्त करने का बीड़ा उठा लिया और अवैध शराब का सारा लाहन सड़कों पर फेंक कर प्रशासन को चेतावनी दे दीं थीं।
