जिले की उचित मूल्य दुकान के विक्रेता ने 7 माह तक गरीबों के हक पर डाका डाला साढ़े 23 लाख का खाद्यान्न डकारा, सहकारिता विभाग की मिलीभगत, पर सेल्समैन एफ आई आर, अभी तक गिरफ्तारी नहीं
उमरिया 21 मार्च 2026 (हिन्द संतरी /सुरेन्द्र त्रिपाठी )जिले के पाली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम कुशमहा खुर्द में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासन और आम जनता दोनों को चौंका दिया है। गरीबों के हक का राशन हड़पने के आरोप में शासकीय उचित मूल्य दुकान कुशमहाखुर्द के तत्कालीन प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद सिंह नापित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब ग्रामीणों ने खाद्य विभाग के पास शिकायत किया और खाद्य विभाग के द्वारा कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति को पूरे मामले की जांच सौंपी गई, जिसकी जांच करने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के बयान दर्ज की, तब लोगों ने जो बताया उसको सुन कर पैरों तले जमीन खिसक गई l शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले एव अति गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न सहकारी समितियों एवं महिला बहुउद्देशीय संस्थाओं के माध्यम से खाद्यान्न वितरित करवाया जाता है और पाली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम कुशमहा खुर्द में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद नापित द्वारा सात माह का खाद्यान्न ही गरीबों को नहीं दिया गया l
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति ने बताया कि जांच के दौरान सहकारी उचित मूल्य दुकान कुशमहा खुर्द के प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद नापित द्वारा जून 2025 से जनवरी 2026 तक 162क्विंटल से अधिक गेहूं, 440 क्विंटल से अधिक चावल, नमक, शक्कर जो पी डी एस और एम डी एम का शामिल रहा, सभी की कीमत 23 लाख 43 हजार 811 रुपए होती है, का गबन किया गया, हितग्राहियों से पी ओ एस मशीन में फिंगर लगवा लिया गया और उनको खाद्यान्न नहीं दिया गया, जिसका गबन गुलाब चंद नापित द्वारा कर लिया गया, सारे मामले को कलेक्टर उमरिया के समक्ष प्रस्तुत किया गया जिस पर उनके द्वारा एफ आई आर करवाने का निर्देश दिया गया और उनके निर्देश पर थाना पाली में एफ आई आर दर्ज करवाया गया l इतना ही नहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि महीने में एक दिन दुकान खुलती थी और सभी से अंगूठा लगवा लिया जाता था और अनाज नहीं दिया जाता था, कुछ हितग्राहियों के घर – घर जाकर परची निकाल ली जाती थी l
पूरे मामले में सबसे खास बात यह है कि जिले ही नहीं प्रदेश भर में सहकारी समितियों के चुनाव न होने के कारण सारी समितियां भंग है और सभी समितियों में प्रशासक नियुक्त है, वहीं शासन के आदेश भी हैं कि बैंक के प्रबंधकों को प्रशासक का दायित्व दिया जाय लेकिन उमरिया जिले में नियम विरुद्ध पदस्थ प्रभारी ए आर सी एस अभय सिंह द्वारा अपनी मनमानी करते हुए सहकारिता निरीक्षक को ही प्रशासक नियुक्त किया गया है उनके द्वारा मिलीभगत कर गरीबों का खाद्यान्न डकारा गया, जबकि प्रति माह उनको निरीक्षण करना चाहिए लेकिन फीलगुड के चलते कोई मौके तक नहीं गया और घर में बैठ कर ही हस्ताक्षर कर दिए जिसमें सबसे बड़ा खेल प्रभारी ए आर सी एस अभय सिंह का है l
हालांकि जांच के बाद प्रशासन ने दुकान को निलंबित कर दिया और पूरे मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। हालांकि, अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
पाली थाना प्रभारी राजेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि विभागीय अधिकारियों की शिकायत पर गुलाब चंद नापित के विरुद्ध गबन का मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की जाएगी।
गौरतलब है कि एस डी एम पाली, खाद्य विभाग और सभी ने मिल कर मात्र प्रबंधक सह विक्रेता गुलाब चंद नापित के विरुद्ध पाली थाने में प्रकरण दर्ज करवा दिया जबकि सहकारिता विभाग के तत्कालीन निरीक्षक और प्रभारी ए आर सी एस की भी जवाबदारी होने के बाद उनके ऊपर प्रकरण दर्ज नहीं करवाया गया जिससे साफ जाहिर होता है कि सभी ने मिल कर हिस्सा तो लिया और बात सामने आने पर एक ही व्यक्ति को दोषी बना दिया, अब देखना होगा कि पुलिस अपनी जांच में सहकारिता निरीक्षक को भी दोषी बनाती है या नहीं और गरीबों को उनके हक का खाद्यान्न मिल पाता है या नहीं
