शिल्पा और शमिता का मंदिर आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष उत्साह का कारण बना। मंदिर परिसर में उनकी मौजूदगी ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
दर्शन के बाद शिल्पा शेट्टी ने भावुकता व्यक्त करते हुए कहा कि महाकाल के दर्शन किसी की इच्छा से नहीं, बल्कि बाबा के बुलावे से होते हैं।
वहीं, शमिता शेट्टी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली महाकालेश्वर मंदिर यात्रा थी और उन्होंने दर्शन के दौरान बाबा महाकाल की उपस्थिति का गहरा अनुभव किया। शमिता ने कहा कि मंदिर में प्रवेश करते ही उन्होंने एक अलग प्रकार की शांति महसूस की। उन्होंने यह भी कहा कि दर्शन के बाद उन्हें गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक सुकून का अनुभव हुआ, जो शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
दोनों बहनों ने मंदिर के प्रत्येक स्थल का ध्यानपूर्वक दर्शन किया और श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चन की। उन्होंने मंदिर परिसर की सफाई और प्रबंधन की भी तारीफ की। शिल्पा और शमिता दोनों ही इस यात्रा को बेहद व्यक्तिगत और आध्यात्मिक अनुभव मानती हैं। उनका कहना था कि मंदिर की दिव्यता और वहां की ऊर्जा ने उनके मन और आत्मा दोनों को शांति और संतोष से भर दिया।
इस अवसर पर भक्तों ने दोनों अभिनेत्रियों के साथ तस्वीरें लेने की कोशिश की और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए मंदिर में उपस्थित रहे। शिल्पा और शमिता ने भक्तों के साथ विनम्रता से बातचीत की और मंदिर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उनके इस आभारी और सम्मानजनक व्यवहार ने सभी भक्तों का मन मोह लिया।
शिल्पा शेट्टी ने यह भी बताया कि वह अक्सर जीवन में ऐसे समय महसूस करती हैं जब कोई चीज़ अचानक आकर्षित करती है। उन्हें लगा कि महाकाल का बुलावा उसी प्रकार का था। शमिता ने भी कहा कि उनके जीवन में यह अनुभव अत्यंत मूल्यवान रहा, क्योंकि उन्होंने पहली बार महाकालेश्वर मंदिर में जाकर आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा महसूस की।
इस तरह, शिल्पा और शमिता शेट्टी की यह यात्रा महाकाल के बुलावे पर हुई एक आध्यात्मिक और यादगार अनुभव रही। उनके अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि महाकालेश्वर मंदिर का वातावरण केवल भक्ति और आस्था से ही नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा हुआ है। दोनों बहनों की यह यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा बनी जो जीवन में आध्यात्मिक शांति और मानसिक सुकून की तलाश में हैं।
