क्या है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। मुद्दा यह है कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज़ का समय और व्यवस्था कैसे होगी।
मुस्लिम पक्ष का दावा:नमाज़ केवल दोपहर 1 से 3 बजे के बीच होती है और पहले भी इसी तरह का इंतजाम किया जा चुका है।
कोर्ट में क्या-क्या कहा गया?
मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे जारी रहेगा और नमाज़ 1 से 3 बजे तक होगी, जबकि बाकी समय पूजा हो सकती है।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि बसंत पंचमी का मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक है, इसलिए पूरे दिन पूजा की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि उस दिन सिर्फ पूजा हो और नमाज़ शाम 5 बजे के बाद कराई जाए।
CJI और जस्टिस बागची की अहम टिप्पणियां
CJI ने कहा, कल बसंत पंचमी है, यह एक विशेष दिन है।जस्टिस बागची ने कहा,पूजा का मुख्य मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है, पहले पूजा पूरी हो जाए, उसके बाद नमाज़ कराई जा सकती है।CJI ने दोनों पक्षों से आपसी बातचीत से समाधान निकालने को कहा और प्रशासन से पूछा कि कल के लिए क्या व्यवस्था है।
मध्यप्रदेश सरकार का रुख
सरकार की ओर से नटराजन ने कहा कि दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग समय और व्यवस्था की जा सकती है, ताकि किसी तरह का टकराव न हो।
क्यों है यह सुनवाई खास?
हिंदू संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने नई अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि 23 जनवरी को भोजशाला में सिर्फ हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले और मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगे। इसी वजह से यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बसंत पंचमी के दिन 3000+ पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात रहेंगे।ड्रोन निगरानी, CCTV, क्विक रिस्पॉन्स टीम और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे इलाके पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
