उत्तर-पश्चिमी अंचल खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग इन दिनों घने कोहरे की चपेट में है। ग्वालियर भिंड मुरैना और दतिया जिलों में सुबह के समय कोहरा इतना घना हो रहा है कि सड़कें हाईवे और आसपास की इमारतें तक साफ दिखाई नहीं दे रही हैं। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई जिससे वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के वक्त लोग हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी रफ्तार से सफर करने को मजबूर हैं।मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में कल्याणपुर शहडोल करौंदी खजुराहो और ग्वालियर शामिल रहे। इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। हालांकि दिन में धूप निकलने से कुछ घंटों के लिए राहत जरूर मिलती है लेकिन सूर्यास्त के बाद ठंड फिर से तीखी हो जाती है और रातें बेहद सर्द बनी हुई हैं।
घने कोहरे का सीधा असर रेल यातायात पर भी पड़ रहा है। दिल्ली–भोपाल–इंदौर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से पहुंच रही हैं। यात्रियों के मुताबिक मालवा एक्सप्रेस झेलम एक्सप्रेस और सचखंड एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड और अनिश्चितता के बीच इंतजार करना पड़ रहा है जिससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल ठंड का असर बना रहेगा लेकिन 15–16 जनवरी के बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहा एक नया पश्चिमी विक्षोभ मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके असर से 16 जनवरी के बाद अगले 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश या मावठा होने की संभावना है।
बारिश के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर देखने को मिल सकती है लेकिन ठंड से तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम विभाग का कहना है कि बादलों और नमी के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को अभी कुछ दिन और सर्दी से सतर्क रहने की जरूरत है।कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में ठंड और कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार धीमी कर दी है। आने वाले दिनों में बारिश जहां किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है वहीं फिलहाल ठंड का असर बरकरार रहने के संकेत हैं।
