लोकायुक्त द्वारा ट्रैप पंचायत सचिव
को मिला दूसरे पंचायत में सचिव का प्रभार, जिंदों को किया मृत घोषित, गरीबों को किया अपात्र, आर एस एस की देता हैं धौंस
उमरिया 03 अप्रैल 2026 (हिन्द संतरी ) जिले में आए दिन अजीबो गरीब मामले सामने आते हैं, कहीं किसी को मृत घोषित कर देना तो किसी को बीपीएल सूची से हटा देना वह भी यह कह कर कि तुम्हारे परिवार में शासकीय सेवक हैं, ऐसा करने वाला और कोई नहीं सी ई ओ जिला पंचायत का विशेष कृपा पात्र पंचायत सचिव है जिसको लोकायुक्त रीवा की टीम ने 24 दिसंबर 2024 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में रिश्वत लेते ट्रैप किया था, और उसको नियम विरुद्ध पुनः दूसरे ग्राम पंचायत में वित्तीय प्रभार दे दिया गया, इतना ही नहीं अपने आपको आर एस एस का पदाधिकारी बता कर लोगों को धौंस भी देता है, कहता है कि मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता, ऐसे में गांव की जनता परेशान होकर सी ई ओ जिला पंचायत से गुहार लगा रही है कि साहब हमको जिंदा कर दो l
पूरा मामला है जिले के करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बड़ागांव का जहां सी ई ओ जिला पंचायत ने पंचायत सचिव के पद पर लोकायुक्त टीम द्वारा घूसखोरी में ट्रैप हुए पंचायत सचिव को पदस्थ कर दिया है, आपको बता दें कि 24 दिसंबर 2024 को शाम करीब 5 बजे तत्कालीन पंचायत सचिव ग्राम पंचायत पठारी कला रामू सोनी को लोकायुक्त रीवा की टीम ने पुराने बस स्टैंड उमरिया में मोची की दुकान में नत्थू लाल बैगा से उसके मृत पुत्र राज कुमार बैगा का मृत्यु प्रमाण पत्र देने के नाम पर 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप किया था, हालांकि उस समय भी सचिव रामू सोनी अपने आप को आर एस एस का पदाधिकारी बता रहा था लेकिन संघ के जिम्मेदारों ने बताया था कि हमारा उससे कोई लेना देना नहीं है, और उसके बाद सचिव रामू सोनी को निलम्बित कर दिया गया लेकिन कुछ ही दिन बाद सी ई ओ जिला पंचायत अभय सिंह ओहरिया का विशेष कृपा पात्र होने के कारण पुनः नियम विरुद्ध ग्राम पंचायत बड़ागांव में सचिव का प्रभार देकर पदस्थ कर दिया गया l रामू सोनी पद प्राप्त करते ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिए और पंचायत में 10 परिवार को गरीबी रेखा सूची से हटा कर अपात्र घोषित कर दिए, वह भी यह कह कर कि आप के परिवार में शासकीय सेवक हैं जिसके चलते आपको शासन की किसी योजना का लाभ नहीं मिल सकता, जबकि वह परिवार जिनको अपात्र घोषित किया गया है वो और उनके लड़के मजदूरी कर अपना गुजारा करते हैं l यहां तक तो ठीक है लेकिन दो परिवार के मुखिया को ही कागजों में मृत घोषित कर दिया उसमें तो एक आदिवासी समुदाय से हैं और एक सामान्य वर्ग से, जब उनको पता चला कि हम तो जीवित ही नहीं हैं तो वो दोनों स्वयं सी ई ओ जिला पंचायत के पास पहुंच गए कि साहब हम जिंदा हैं हमको सचिव ने मृत घोषित कर दिया है आप तो जीवित मान लो, आपके सामने खड़े है l
पीड़ित अशोक द्विवेदी ने बताया कि हमारा नाम गरीबी रेखा सूची से सचिव रामू सोनी के द्वारा काट दिया गया है और उनके द्वारा बताया गया है कि आपके परिवार में शासकीय सेवक हैं जबकि हमारे परिवार में कोई भी व्यक्ति शासकीय सेवक नहीं है, उनके द्वारा पहले भी कहा जाता था कि जो भी द्विवेदी परिवार के लोग हैं उन सभी का नाम मैं पोर्टल से काट दूंगा, उनको किसी भी शासकीय योजना का लाभ नहीं मिलने दूंगा और सभी को कटोरा पकड़ा दूंगा साथ ही यह भी कहा जाता है कि मैं आर एस एस का प्रमुख हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है और मेरा कुछ नहीं होने वाला है, न मैं किसी को डरता हूं l
वहीं दूसरे मृत व्यक्ति जुगराज सिंह गोंड़ ने बताया कि मैं ग्राम बड़ागांव का रहने वाला हूं मेरा नाम सचिव रामू सोनी ने काट दिया है और मेरे को मृत घोषित कर दिया है कहता है कि मैं आर एस एस का आदमी हूं मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता है, साहब मैं जिंदा हूं मेरे को मृत घोषित किया गया है मेरे को कोई लाभ नहीं मिल रहा है, मैं गोंड समाज समाज से आदिवासी समुदाय से आता हूं फिर भी मेरा नाम काट दिया गया है मेरे को मृत घोषित कर दिया है, मैं गरीब आदमी किसी को नहीं जानता, मैं किसी को नहीं पहचानता अब मैं जाऊं तो कहां जाऊं l
वहीं ग्राम बड़ागांव निवासी अनिल कुमार ने बताया कि मैं आज अपने कुछ साथियों के साथ जिला पंचायत सी ई ओ के यहां आवेदन देने आया था, आवेदन में उल्लेख यह है कि हम सभी का नाम बीपीएल सूची एवं पात्रता पर्ची से सचिव रामू सोनी के द्वारा हटा दिया गया है, किसी में यह उल्लेख किया गया है कि किसी परिवार में शासकीय सेवक हैं और किसी में उल्लेख किया गया है कि उनके पास गाड़ी घोड़ा है और मेरे में यह उल्लेख किया गया है कि मैं ही परिवार का मुखिया हूं और मुझे ही मृत घोषित कर दिया गया है, मेरे साथ जुगराज सिंह को भी मृत घोषित कर दिया गया है, सचिव रामू सोनी कहता है कि मैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उमरिया जिले का प्रमुख हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, आपको जहां शिकायत करना हो वहां कीजिए, अभी hm लोगों ने सी ई ओ जिला पंचायत से मुलाकात किया है और वो कार्रवाई की बात किए हैं l अब हमको तो सामने देख रहे हैं कि hm जिंदा हैं या मुर्दा हैं लेकिन शासकीय कागजों में मृत घोषित कर दिए गए हैं l
वहीं सी ई ओ जिला पंचायत अभय सिंह ओहरिया ने बताया कि हमारे पास ग्राम बड़ागांव से आवेदक आए थे तो मैने उनसे पूछा है कि कब से आप लोग मृत घोषित कर दिए गए हैं तो उन लोगों ने बताया कि जब से ये सचिव आए हैं तब से मृत घोषित हो गए हैं तो मैं उसका परीक्षण करवा लेता हूं, कि किस आधार पर यह कार्रवाई की गई है और क्यों मृत घोषित किया गया है और सेकेंडरी यह कि जिनको शासकीय सेवक नहीं होने के बाद भी अपात्र किया गया है, तो कौन से नियम में और किस योजना में अपात्र कर दिया गया है, ऐसा कोई सर्कुलर नहीं है सभी शासकीय योजनाओं के अलग अलग दिशा निर्देश हैं, हम इसकी टीम बना कर जांच करवाएंगे और यदि सचिव द्वारा गलत तरीके से कार्रवाई की गई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी l वहीं जब पूंछा गया कि लोकायुक्त द्वारा ट्रैप किए जाने के बाद भी वित्तीय प्रभार दिया गया है तो सफाई देते हुए कहे कि जो लोकायुक्त के दिशा निर्देश हैं उसके आधार पर जिस स्थान पर घटना हुई है वहां से तुरंत हटाने के निर्देश हैं तो हमने उसको 24 घंटे के अंदर उस जगह से हटा दिया है और जहां तक निलंबन की बात है तो माननीय लोकायुक्त द्वारा जब चालान पेश कर दिया जाएगा और हमको सूचना दी जाएगी तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे l
गौरतलब है कि सचिव रामू सोनी द्वारा आर एस एस जैसी संस्था को खुले आम बदनाम किया जा रहा है, ऐसे में आर एस एस को भी एक्शन लेना चाहिए और वहीं खुले आम गरीबों के नाम बीपीएल सूची से हटाने के साथ जीवित को मृत घोषित किया जा रहा है जबकि यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 198 बी एन एस के तहत आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है, वहीं यदि देखा जाय तो सी ई ओ जिला पंचायत अभय सिंह ओहरिया द्वारा जो दलील दी गई कि हमने सचिव रामू सोनी को लोकायुक्त द्वारा ट्रैप होने के बाद तत्काल उस स्थान से हटा दिया तो उसमें भी, पंचायत एक्ट या सामान्य सेवा नियमों के तहत लोकायुक्त में ट्रैप (घूसखोरी) होने के बाद पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाता है और उसके वित्तीय प्रभार वापस ले लिए जाते हैं। लोकायुक्त प्रकरण के लंबित रहने के दौरान उसे पुनः किसी दूसरी पंचायत में वित्तीय प्रभार देना प्रशासनिक नियमों, विशेषकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामलों में, अनुचित और नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में शासन के किसी भी नियमों का पालन न होकर मनमानी किया जा रहा है और यही कारण है कि जनता त्राहि त्राहि कर रही है l
