जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
पत्नी का दर्दनाक लेकिन साहसी रुख
शहीद की पत्नी शिवानी ने अपने पति के शव के पास बैठकर बार-बार बलाएं लेकर अपने पति के गाल चूमा और सभी को हिम्मत दी। उनका यह साहस देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र से आखिरी कॉल पर शैलेंद्र ने कहा था कि उन्हें डर लग रहा है। उन्होंने सपना देखा था कि उनकी बेटियाँ पढ़ाई के बावजूद सफल नहीं हो रही हैं, और परिवार शादी के लिए परेशान है। शिवानी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि रिटायरमेंट के बाद प्लॉट बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे, लेकिन शैलेंद्र ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है।”
परिवार की शौर्य गाथा: दादा भी थे शहीद
शैलेंद्र के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और आंसूओं के साथ बताया कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र उनके दूसरे बेटे थे। उन्होंने कहा कि उनका दादा भी 1972 में शहीद हुए थे, और आज उनका बेटा भी देश के लिए शहीद हुआ है।
शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने कहा कि परिवार को दुख है, लेकिन फौजी होने पर गर्व भी है। उन्होंने बताया कि वे तीनों भाई सेना में सेवा कर चुके हैं और देश रक्षा में शैलेंद्र की शहादत पर उन्हें गर्व है।
अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और “शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें” के नारे लगाए। शमशान घाट पर जब मासूम भावेश ने पिता का शव देखा तो वह फूट-फूटकर रो पड़ा और मुखाग्नि देने से पहले पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है और परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
