जानकारी के अनुसार, MP PSC कार्यालय के सामने 27 जनवरी तक धरना प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित समय और तय डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जाए। इसके बावजूद प्रदर्शन के दौरान बार-बार तेज आवाज में माइक और साउंड सिस्टम का उपयोग किए जाने की शिकायतें सामने आईं।
बताया जा रहा है कि धरना समाप्त होने के बाद जब प्रदर्शनकारियों द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा था, उस समय भी लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मौके पर ध्वनि स्तर की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि माइक की आवाज तय डेसिबल सीमा से ज्यादा थी। इससे MP PSC कार्यालय के आसपास के इलाके में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बन गई और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित रखना अनिवार्य है। इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
इस मामले में पुलिस ने राधे जाट, रंजीत सहित कुल चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और ध्वनि मापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संयोगितागंज थाना पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही प्रदर्शनकारियों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत दी थी, इसके बावजूद लाउडस्पीकर की तेज आवाज का उपयोग किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन इसके लिए तय नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।
इस कार्रवाई के बाद शहर में यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कार्यक्रम या प्रदर्शन के दौरान नियमों का पालन करें, ताकि दूसरों को असुविधा न हो। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
