मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित मासूम रोज की तरह विद्या के मंदिर में शिक्षा ग्रहण करने पहुंची थी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस शिक्षक की सुरक्षा में वह स्कूल जा रही है, वही उसकी मासूमियत को रौंदने की ताक में बैठा है। आरोपी शिक्षक ने मासूम को बहला-फुसलाकर स्कूल परिसर में ही बन रहे एक निर्माणाधीन कक्ष में ले गया। एकांत का फायदा उठाकर आरोपी ने छात्रा के कपड़े उतारे और उसके साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया। इस घिनौनी हरकत से सहमी मासूम जोर-जोर से रोने लगी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर और पकड़े जाने के डर से आरोपी ने उसे डराया-धमकाया और इस बारे में किसी को न बताने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।
रोती-बिलखती मासूम जब अपने घर पहुंची, तो उसने अपनी दादी को पूरी आपबीती सुनाई। पोती की जुबानी शिक्षक की काली करतूत सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए परिजन बच्ची को लेकर पलेरा थाने पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस घटना की खबर जैसे ही कस्बे में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। हिंदू संगठनों ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों और संगठनों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दोषी शिक्षक के खिलाफ न केवल कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, बल्कि उसके घर पर प्रशासन का बुलडोजर चलाकर कड़ी नजीर पेश की जाए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और पुलिस हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है कि कैसे शिक्षण संस्थानों में भी बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है।
