घटनाक्रम की शुरुआत लगभग ढाई महीने पहले हुई थी जब पीड़िता की मुलाकात इंस्टाग्राम के जरिए गणेश चौधरी से हुई। बातों का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे धीरे आरोपी ने बालिका को अपने जाल में फँसा लिया। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आरोपी अक्सर रात के समय बालिका को चौपाटी पर बुलाता था और फिर वहाँ से उसे एक होटल ले जाकर उसके साथ बार बार दुष्कर्म करता था। दरिंदगी का यह सिलसिला चार पांच बार दोहराया गया। मासूम बालिका लोक लाज और डर के मारे खामोश रही लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
करीब एक महीने पहले जब बालिका को पता चला कि वह गर्भवती हो गई है तो उसने यह बात आरोपी को बताई। पकड़े जाने के डर से आरोपी गणेश चौधरी ने पीड़िता को गर्भपात की दवा लाकर दी और उसे खाने के लिए मजबूर किया। दवा खाने के बाद बालिका की सेहत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे लगातार उल्टियां और पेट में असहनीय दर्द होने लगा। शुरू में परिजनों को लगा कि यह सामान्य बीमारी है लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई तो 7 अप्रैल को उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में जांच के दौरान जो सच्चाई सामने आई उसने माता पिता के पैरों तले जमीन खिसका दी। डॉक्टरों ने खुलासा किया कि बालिका करीब दो महीने की गर्भवती थी और गलत दवा के सेवन के कारण उसका गर्भ गिर चुका था जिससे संक्रमण उसके पूरे शरीर में फैल गया था। दुर्भाग्यवश तीन दिनों तक जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शुक्रवार 10 अप्रैल को उपचार के दौरान बालिका ने दम तोड़ दिया।
पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। गणपति नाका थाना प्रभारी सुरेश महाले के अनुसार 7 अप्रैल को शिकायत मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई थी और 8 अप्रैल को ही आरोपी गणेश चौधरी को हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट 2012 की धारा 5 एवं 6 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 64(2)(एम) और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ा मामला दर्ज किया है। इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों के सामने यह चुनौती खड़ी कर दी है कि वे अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों के प्रति अधिक सचेत और जागरूक रहें।
