स्थानीय लोग इस दृश्य को आस्था से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन वन विभाग का कहना है कि यह बाघ का सामान्य व्यवहार है। वन विभाग के अनुसार जंगली बाघ अक्सर अपनी गंध छोड़ने इलाके पर अधिकार जताने या खुजली मिटाने के लिए पत्थर या अन्य ठोस सतहों से अपना शरीर रगड़ते हैं। ऐसे मूवमेंट का आस्था से जोड़ना गलत नहीं है लेकिन यह जानवर की आदत और इलाके में उसके क्षेत्रीय व्यवहार का हिस्सा है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को किया अलर्ट
वन विभाग का कहना है कि बाघों का इस तरह से शिवलिंग या पत्थर पर सिर रगड़ना सामान्य व्यवहार है और इसमें किसी प्रकार की आस्था या अलौकिक घटना शामिल नहीं होती। हालांकि ग्रामीणों के लिए यह नजारा डरावना भी हो सकता है। अधिकारी ने चेतावनी दी है कि ग्रामीण जंगल में अकेले न जाएं और बच्चों को भी जंगल की ओर जाने से रोका जाए।
सडार जंगल कटनी जिले के लिए जंगली जीवन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बाघ तेंदुआ और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। वन विभाग की नियमित गश्ती और निगरानी के कारण अब तक किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी नहीं मिली है। बावजूद इसके गांव के पास बाघ का दिखना स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। लोग इसे देख कर अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं कुछ लोग इसे आस्था का संकेत मान रहे हैं जबकि विशेषज्ञ इसे जानवरों की प्राकृतिक आदत के रूप में बता रहे हैं।
वन विभाग ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे जंगल में जाने से बचें बाघ के संभावित मूवमेंट को नजरअंदाज न करें और यदि किसी ने बाघ देखा तो तुरंत नजदीकी वन विभाग को सूचित करें। इस तरह की सतर्कता न केवल मानव सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
