क्या है पूरा विवाद फ्लैशबैक
यह विवाद पिछले साल महू में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ था जहाँ मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ कथित तौर पर “आतंकियों की बहन” जैसे अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था। कर्नल कुरैशी भारतीय सेना की एक सम्मानित अधिकारी हैं। इस बयान पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर के आदेश दिए थे जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास ट्रांसफर कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख 19 जनवरी 2026
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा की जा रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत की प्रमुख टिप्पणियां: SIT रिपोर्ट तैयार कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुका है जिसमें मंत्री पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई है। देरी पर सवाल कोर्ट ने कहा कि सरकार अगस्त 2025 से इस रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठी है। अब फैसला लेने का समय आ गया है। माफी नामंजूर अदालत ने विजय शाह की ऑनलाइन माफी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है और यह केवल कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
आदिवासी वोट बैंक राजनीतिक मजबूरी विजय शाह गोंड राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और 8 बार के विधायक हैं। प्रदेश की 21% आदिवासी आबादी और 47 आरक्षित सीटों पर उनका गहरा प्रभाव है। उन्हें हटाना या उन पर कार्रवाई करना भाजपा के आदिवासी समीकरणों को बिगाड़ सकता है। न्यायपालिका का दबाव कानूनी बाध्यता सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। यदि सरकार मंजूरी नहीं देती है तो उसे कोर्ट में ठोस कानूनी कारण बताने होंगे जो SIT की रिपोर्ट के बाद मुश्किल दिख रहा है।
अगला कदम क्या होगा
मुख्यमंत्री मोहन यादव फिलहाल स्विट्जरलैंड दावोस के दौरे पर हैं और उनके 23 जनवरी को लौटने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार उनके लौटने के बाद विधि विभाग और महाधिवक्ता के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। पार्टी नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या मंत्री से इस्तीफा लिया जाए या कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर समय मांगा जाए।
