उज्जैन। विक्रमोत्सव 2026 का शुभारंभ उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व से होगा। यह महोत्सव देश-दुनिया में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का अनूठा उत्सव होगा। महाशिवरात्रि पर प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम की प्रस्तुति शिवोऽहम से होगी। विक्रमोत्सव में इस वर्ष सबसे महत्वपूर्ण और देश का सबसे बड़ा सम्मान ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान’ आकर्षण का केंद्र होगा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमोत्सव की शुरूआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 2006 में की गयी थी। आज यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो चला है। इस आयोजन में अब तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां हो चुकी है। इस वर्ष टॉप रेंकिंग कलाकार प्रीतम 15 फरवरी को अपनी प्रस्तुति के लिए आ रहे हैं। इसी प्रकार हिंदू नववर्ष चैत्र प्रतिपदा 19 मार्च को विशाल मिश्रा अपने बैंड के साथ प्रस्तुति देने आएंगे।
श्री तिवारी ने बताया कि महोत्सव में 41 से अधिक बहुआयामी गतिविधियां शिवरात्रि मेलों का समारंभ, महाकाल वन मेला, कृषि मेला, कलश यात्रा, विक्रम व्यापार मेला, संगीत, नृत्य, वादन, शिवपुराण, अनादि पर्व, विक्रम नाट्य समोराह, पुतुल समारोह, संगीत का उद्भव और विकास पर केंद्रित अनहद वैचारिक समागम, चित्र प्रदर्शनियां, संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय समागम, भारतीय इतिहास समागम, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, वेद अंताक्षरी, कोटि सूर्योपासना, शिल्प कला कार्यशाला, प्रकाशन लोकार्पण, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, बोलियों एवं हिन्दी रचनाओं का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर मातृशक्ति कवयित्री सम्मेलन, ड्रोन शो आदि शामिल है।
यह महत्वपूर्ण गतिविधियां सम्पन्न होंगी आयोजन के दौरान
* महाशिवरात्रि पर प्रदेश के 60 से अधिक प्रमुख शिव मंदिरों में मेलो का आयोजन होगा,जिसमें मंदिरों की साजसज्जा, साफ-सफाई एवं सांस्कृतिक गतिविधियां प्रमुख हैं।
* विक्रमोत्सव अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर एवं कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में पौराणिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, जनजातीय विषयों पर 7 विभिन्न प्रदर्शनियां लगेंगी। जिसमें सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, आर्ष भारत, महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्र, चक्रव्यूह, पताकाएं, शंख, 84 महादेव, जनजातीय देवलोक, श्रीकृष्ण प्रभात एवं रागमाला प्रमुख है। इन प्रदर्शनियों को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा तैयार किया गया है।
* राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुकी नाट्य प्रस्तुतियों पर केन्द्रित दस दिवसीय विक्रम नाट्य समारोह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा तैयार की गई प्रस्तुतियों जटायुवध, चारूदत्तम, भरतवाक्य, जाति जीवन, अभिज्ञान शाकुन्तलम् और चतुर्भाणी शामिल है। अंधायुग, भूमि सूर्य वीरगाथा, आदि-अनंत, अभंग नाद, सौगंधिकाहरणं का भी मंचन होगा।
