दरअसल, जनवरी 2026 में BCCI ने सुरक्षा और राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए मुस्ताफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग से हटाने का आदेश दिया था। कोलकाता नाइट राइडर्स ने BCCI के निर्देश पर उन्हें रिलीज किया और रिप्लेसमेंट खिलाड़ी शामिल किया। अब सवाल है कि क्या अबरार पर वही कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, स्थिति बिल्कुल अलग है। IPL में BCCI का पूरा नियंत्रण होता है, जबकि ‘द हंड्रेड’ इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के अधिकार क्षेत्र में आता है। BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने स्पष्ट किया कि यह मामला भारतीय बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। किसी खिलाड़ी को ‘द हंड्रेड’ से हटाने का निर्णय केवल ECB के नियम और प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।
अबरार अहमद को सनराइजर्स लीड्स ने £1,90,000 (लगभग ₹2.34 करोड़) में खरीदा। टीम की CEO काव्या मारन, जो IPL में भी Sunrisers Hyderabad की CEO हैं, नीलामी में मौजूद थीं। जैसे ही घोषणा हुई, सोशल मीडिया पर भारतीय फैन्स ने विरोध शुरू कर दिया और कई अकाउंट्स को सस्पेंड करना पड़ा।
‘द हंड्रेड’ के नियमों के अनुसार, कोई भी खिलाड़ी केवल तब रिप्लेसमेंट रोस्टर में शामिल हो सकता है, जब उसने ऑक्शन या वाइल्डकार्ड ड्राफ्ट के लिए रजिस्ट्रेशन किया हो। किसी फ्रेंचाइजी की इच्छा पर खिलाड़ी को बाहर नहीं किया जा सकता। असाधारण स्थिति में टीम ECB की Competition Technical Committee को लिखित अनुरोध भेज सकती है, और मंजूरी मिलने पर ही रिप्लेसमेंट खिलाड़ी साइन किया जा सकता है।
लीग के नियमों के अनुसार हर टीम को 100 गेंदों में बल्लेबाजी का मौका मिलता है। गेंदबाज लगातार 5 या 10 गेंद फेंक सकते हैं, एक मैच में अधिकतम 20 गेंद। हर टीम को 25 गेंद का पावरप्ले मिलता है, जिसमें केवल 2 फील्डर 30 यार्ड सर्कल के बाहर खड़े हो सकते हैं। मैच की अवधि लगभग 2.5 घंटे होती है। जीतने वाली टीम को 4 अंक मिलते हैं, जबकि टाई या बारिश की स्थिति में दोनों टीमों को 2-2 अंक।
संक्षेप में, अबरार अहमद IPL की तरह BCCI आदेश से नहीं हटाए जा सकते। उनका भविष्य पूरी तरह ECB के नियम और प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। भारतीय फैन्स का विरोध जितना तेज है, लेकिन फ्रेंचाइजी और बोर्ड की सीमित भूमिका के कारण फिलहाल अबरार ‘द हंड्रेड 2026’ में खेलते रहेंगे।
