पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI को साफ शब्दों में आगाह किया है कि मौजूदा ढांचे के साथ वनडे क्रिकेट को बचाना मुश्किल होगा। दोनों का मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज की घटती अहमियत और टूर्नामेंट्स की अधिकता ने इस फॉर्मेट की चमक फीकी कर दी है।कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां पांच मैचों की वनडे सीरीज आम बात हुआ करती थीं, वहीं अब ज्यादातर टीमें केवल तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेलती नजर आती हैं। कई देशों के लिए वनडे क्रिकेट अब सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता जा रहा है, जबकि टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स ने दर्शकों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया है।
अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ऐश की बात में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े नाम वनडे क्रिकेट से हटते हैं तो दर्शकों की दिलचस्पी और तेजी से कम हो सकती है। अश्विन ने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को आमतौर पर सीमित दर्शक ही देखते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भारी भीड़ देखने को मिली।उनके मुताबिक, यह साफ संकेत है कि मौजूदा दौर में वनडे क्रिकेट काफी हद तक स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर है। अगर बड़े चेहरे नहीं होंगे, तो दर्शकों को आकर्षित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। अश्विन ने ICC के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से फैंस में थकान पैदा हो रही है और हर इवेंट की अहमियत कम होती जा रही है।
अश्विन ने सुझाव दिया कि ICC को फुटबॉल की तर्ज पर वनडे विश्व कप को चार साल में सिर्फ एक बार आयोजित करना चाहिए ताकि इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच बना रहे। उनका कहना है कि जब कोई इवेंट दुर्लभ होता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।वहीं इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय सीरीज अब दर्शकों को रोमांचित नहीं कर पा रही हैं। इरफान के अनुसार, अगर वनडे क्रिकेट को फिर से लोकप्रिय बनाना है, तो ट्राई सीरीज और क्वाड्रेंगुलर सीरीज जैसे फॉर्मेट्स को दोबारा शुरू करना होगा।
इरफान का मानना है कि जब एक ही सीरीज में तीन या चार टीमें हिस्सा लेती हैं तो मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और हर मैच का महत्व भी ज्यादा होता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और खिलाड़ियों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका मिलता है।कुल मिलाकर अश्विन और इरफान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और साहसिक फैसले नहीं लिए तो वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। 50 ओवर का यह पारंपरिक फॉर्मेट कभी क्रिकेट की पहचान हुआ करता था, लेकिन बदलते दौर में इसे बचाने के लिए बड़े और दूरदर्शी बदलाव अब जरूरी हो गए हैं।
