स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ऐतिहासिक उछाल
WPP मीडिया की ‘स्पोर्टिंग नेशन 2025’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खेल उद्योग का आकार 13.4% 18,864 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले चार वर्षों में इसका लगभग दोगुना भुगतान किया गया है। मीडिया में कलाकारी का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जो अब तक 9,571 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि डिजिटल विज्ञापन ने पहली बार टीवी सुपरस्टार को पीछे छोड़ दिया।
क्रिकेट का सुपरमार्केट: 89% स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल खेल उद्योग में क्रिकेट की दुकान 89% है। यह चित्र बताता है कि किस देश में अन्य खेलों के अलावा क्रिकेट पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है और क्यों आईपीएल के लिए सबसे बड़ा मंच बन गया है।
स्पॉन्सरशिप बाजार में भी तेजी से बढ़ रही है
रियल मनी गेमिंग सेक्टर पर मजबूत प्रभाव के बावजूद स्पॉन्सरशिप बाजार में 8% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 7,949 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
पहले जहां ड्रीम11 और माय11सर्कल जैसे ब्रांड्स की मार्केटिंग होती थी, अब उनकी जगह गूगल और अपोलो टायर्स जैसे बड़े और पारंपरिक ब्रांड्स ने ले ली है। गूगल ने एआई इवेंट के दौर में क्रिकेट में भारी निवेश किया है और आईपीएल सहित महिला विश्व कप और टी20 विश्व कप जैसे टूर्नामेंटों में प्रमुख भागीदारी निभाई है।
आईपीएल में ₹1000 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार
इंडियन प्रीमियर लीग ने इस बार एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पहली बार आईपीएल चैंपियनशिप की स्पॉन्सरशिप 1000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 1,033 करोड़ रुपये की स्पॉन्सरशिप मिली है।
इन आंकड़ों की सबसे बड़ी कमाई
इस रेस में मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और चेन्नई सुपर किंग्स के बड़े स्कोर सबसे आगे हैं। ये सूची अकेले लगभग 150 करोड़ रुपये तक की स्पॉन्सरशिप से कमा रही हैं।
आईपीएल: खेल से आगे, बिजनेस का सुपरमॉडल
आज आईपीएल केवल क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं रह गया है, बल्कि इसकी ब्रांडिंग, विज्ञापन और निवेश का सबसे बड़ा मंच बन गया है। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और स्पॉन्सरशिप लेकर प्लेयर्स की नीलामी तक—हर स्तर पर करोड़ों रुपये का गेम है। यही कारण है कि आईपीएल को अब ‘नोट छापने की मशीन’ कहा जाने लगा है।
