पहला प्रयास गोल्डन, पुष्ट खिलाड़ियों का सामान में
भारतीय टीम ने फरवरी में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एशियाई लैक्रोस खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिक्सेज में पुरुष और महिला दोनों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पुरुष टीम ने फाइनल में इराक को हराया, जबकि महिला टीम ने पाकिस्तान को मात देकर खिताब जीता। खास बात यह है कि भारतीय महिला टीम ने 2024 में और पुरुष टीम ने 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत की थी, ऐसे में यह जीत और भी ऐतिहासिक बन गई। देश के अलग-अलग राज्यों से आए खिलाड़ियों ने मिलकर बनाई ये सफलता हासिल की, जो भारत में इस खेल के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।
सरकार का समर्थन और पर्वतारोहण, भारत से सक्रिय ताकतें खेलें
मनसुख मंडाविया ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहायता की पेशकश करती है और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सलाह देती है। उन्होंने खिलाड़ियों से अधिक अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने, फिटनेस पर ध्यान देने और लगातार मेहनत करने पर जोर दिया। उनका मानना है कि सही दिशा में प्रयास जारी रहे तो भारत लैक्रोस नए खेलों में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
आगे का रास्ता मोटरसाइकल, लेकिन मोटरसाइकल से भरा
लैक्रोस को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 में शामिल होने के बाद एशिया में इस खेल का आयोजन और भी तेज होने वाली है। आने वाले महीनों में भारतीय टीम के सामने कई अहम टूर्नामेंट होंगे, जिनमें चीन के चेंगदू में होने वाले एशियन लैक्रोस गेम्स और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एशिया-पैसिफिक सिक्स लैक्रोस चैंपियनशिप शामिल हैं। ये प्रतियोगिताएं ओलम्पिक क्वाल एस्कॉर्ट के लिए बेहद अहम साबित होती हैं। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के पास सुनहरा मौका है कि वे अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर सिर्फ क्वालिफाई न करें, बल्कि ओलंपिक में भी देश को गौरवान्वित करें।
