भारतीय पारी की शुरुआत से ही वैभव ने शानदार खेल दिखाया। शुरुआती ओवरों में गेंद को भली-भांति समझने के बाद उन्होंने बड़े शॉट्स खेलना शुरू किया और मैदान के चारों ओर रन बटोरे। महज 63 गेंदों में शतक पूरा कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह केवल प्रतिभाशाली बल्लेबाज नहीं बल्कि मैच की परिस्थिति को समझने वाले लीडर भी हैं। उनकी 127 रन की पारी में लंबी हिटिंग सटीक टाइमिंग और आक्रामकता का शानदार मेल देखने को मिला।
वैभव को इस पारी में ओपनिंग साथी आरोन जॉर्ज का भी साथ मिला। दोनों ने पहले विकेट के लिए 200 से अधिक रन की साझेदारी की, जिससे भारतीय टीम ने मजबूत स्कोर की नींव रखी। इस साझेदारी ने न केवल रन गति को तेज रखा, बल्कि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस तरह की पारियों ने टीम के आत्मविश्वास को भी ऊँचाई पर पहुंचाया।तीसरे वनडे में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। अंडर-19 वनडे में उनके कुल रन अब भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। कम मैचों में लगातार रन बनाते हुए उनका औसत और खेल का संतुलन चयनकर्ताओं और क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
इस सीरीज में भारत पहले ही दोनों मुकाबले जीतकर बढ़त बना चुका था। तीसरे वनडे में भी टीम ने अपनी संतुलित बल्लेबाजी और रणनीति से यह स्पष्ट कर दिया कि टीम में आत्मविश्वास और खेल भावना की कमी नहीं है। प्लेइंग इलेवन में किए गए बदलावों के बावजूद भारतीय बल्लेबाजी क्रम मजबूत और संतुलित नजर आया।वैभव सूर्यवंशी का यह प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय अंडर-19 टीम में नेतृत्व और व्यक्तिगत प्रतिभा का सही संतुलन है। उनकी कप्तानी में टीम का खेल और रणनीति दोनों बेहतर नजर आए। मौजूदा सीरीज में उनका लगातार योगदान भारत की सफलता में सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा है। युवा बल्लेबाज के रूप में उनकी यह पारी न केवल फैंस के लिए उत्साहजनक है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की संभावनाओं को भी उजागर करती है।
