उपकप्तान अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठाना। उनकी जगह ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया, लेकिन मैच का नतीजा भारत के पक्ष में नहीं गया और अब इस रणनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हार के बाद भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बात करते हुए स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी दबाव या व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि पूरी तरह रणनीतिक सोच के तहत लिया गया था। उनके अनुसार, कप्तान सूर्यकुमार यादव और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मैच से पहले अक्षर से लंबी और सकारात्मक चर्चा की थी, जिसमें टीम संयोजन और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को ध्यान में रखते हुए स्थिति समझाई गई थी। दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष क्रम में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी को देखते हुए टीम मैनेजमेंट को लगा कि ऑफ स्पिन विकल्प अधिक कारगर साबित हो सकता है, इसलिए संयोजन में बदलाव किया गया।
शुरुआती ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने असर भी दिखाया और कुछ महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, जिससे रणनीति सही दिशा में जाती दिखी, लेकिन बीच के ओवरों में गेंदबाजी योजना पटरी से उतर गई। खास तौर पर सुंदर से पावरप्ले में गेंदबाजी नहीं कराई गई, जबकि मूल रणनीति यही थी कि वे नई गेंद से बाएं हाथ के बल्लेबाजों पर दबाव बनाएंगे। बल्लेबाजी मोर्चे पर भी टीम अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी और नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका हाथ से निकल गया। नतीजा यह रहा कि दक्षिण अफ्रीका ने लक्ष्य का बचाव करते हुए एकतरफा जीत दर्ज कर ली। इस हार ने अंकतालिका की तस्वीर बदल दी है और अब भारत के लिए सुपर-8 के बाकी मुकाबले किसी फाइनल से कम नहीं रह गए हैं। सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए टीम को अपने शेष दोनों मैच हर हाल में जीतने होंगे। हालांकि कोटक ने भरोसा जताया कि भारतीय खिलाड़ी बड़े मंच और दबाव की परिस्थितियों के अभ्यस्त हैं और वापसी की क्षमता रखते हैं। कुल मिलाकर, अक्षर को बाहर करने का निर्णय रणनीतिक था, लेकिन मैदान पर रणनीति का सही क्रियान्वयन न हो पाने और बल्लेबाजों के फ्लॉप प्रदर्शन ने भारत की राह मुश्किल कर दी है; अब देखना होगा कि टीम इस झटके से कितनी जल्दी उबरकर मजबूती से वापसी करती है।
