हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, हर हफ्ते करीब 23 करोड़ उपभोक्ता चैटजीपीटी से हेल्थ और वेलनेस से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। इन बीमारियों की जानकारी, इन बीमारियों की जानकारी, मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट, डॉक्युमेंट्री डॉक्युमेंट्स और हेल्थ क्रॉनिकल्स जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। कई लोग बिना सोचे-समझे अपना पूरा मेडिकल डिटेल्स चैटबॉट में डाल देते हैं, जो साइबर टेक्नोलॉजीज के नमूनों से खतरनाक है।
OpenAI ने हाल ही में ChatGPT हेल्थ नाम का मंच पेश किया है और दावा किया है कि ग्राहकों का मेडिकल डेटा विश्वास रहता है और AI ट्रेनिंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। वहीं एंथ्रोपिक ने भी क्लाउड एआई लॉन्च किया है, जो स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह देता है। हालाँकि, डेटा प्राइवेट स्टैट्स इस कथन को लेकर पूरी तरह से भिन्न नहीं हैं।
द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ डेटा से जुड़े विशेषज्ञ का कहना है कि एआई कंपनी की प्राइवेट सिक्योरिटी भविष्य में बदल सकती है। आज जो डेटा सुरक्षित बताया जा रहा है, वह कल एआई मॉडल प्रशिक्षण या किसी अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, डेटा लीक, हैकिंग या गलत इस्तेमाल का खतरा भी हमेशा बना रहता है।
लैब्स साक्षा में कथित तौर पर चेतावनी दी गई है कि मेडिकल रिपोर्ट, बीमारी की पूरी कहानी, निकोलस की लिस्ट, टेस्ट रिजल्ट, बोर्ड पेपर, बेस-पैन जैसी पहचान से जुड़ी जानकारी एआई चैटबॉट्स के साथ कभी साझा नहीं की जानी चाहिए। यह डेटा अगर गलत हाथों में चला गया तो नशीला फ्रॉड, पहचान की चोरी और निजी जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
एआई चैटबॉट्स की जानकारी और मदद के लिए उपयोगी हैं, लेकिन डॉक्टर या सेफ प्लेटफॉर्म का विकल्प नहीं। प्रश्नावली, सामान्य सलाह लें, लेकिन आपकी निजी और प्रेरक जानकारी खुद तक ही सीमित है। क्योंकि डिजिटल दुनिया में एक छोटी सी गलती से भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है।
