
जिले के वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के कैप में 6 हजार 200 क्विंटल धान पिछले तीन वर्षों से सड़ा एव बदबू मारता पड़ा हुआ है, अब तक इस पर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई।
उमरिया 27दिसंबर 2025(हिन्द संतरी) सुरेन्द्र त्रिपाठी जिले के चंदिया ओपन कैप में चबूतरों पर रखी तिरपाल से ढकी यह धान पूरी तरह सड़ कर बदबू मार रही है इसके चलते न केवल वहां काम करने वाले कर्मचारियों और किसानों को परेशानी हो रही है, बल्कि वर्तमान धान उपार्जन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। चबूतरों पर जगह घिरी होने के कारण नई धान के भंडारण में भी दिक्कतें आ रही हैं। खराब पड़ी धान की कीमत डेढ़ करोड़ रुपए रुपये है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है, इतना ही नहीं इसको गड्ढा खुदवा कर गड़वाया जाएगा तो उसमें भी आर्थिक क्षति होगी और यदि इसी तरह पड़ी रहेगी तो आसपास के क्षेत्र में बीमारियां भी होंगी।
इस मामले में एमपी वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन की प्रबंधक एवं जिले की नोडल अधिकारी लक्ष्मी मरावी ने बताया कि वर्ष 2022 की धान रखी हुई है जिसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपए के आसपास होगी, उस वर्ष कच्चे कैप लगाए गए थे जिसको मिलिंग पॉलिसी के चलते मिलर जल्दी नहीं उठाए और लगातार पाला गिरता गया और उसको कोई भी मिलर नहीं उठाए जो धीरे – धीरे इकठ्ठा होती गई और इतनी हो गई, इसकी जानकारी हमेशा भोपाल भेजी जाती है लेकिन वहां से कोई पत्र और निर्देश नहीं आ रहा है।
गौरतलब है कि इसी तरह वर्ष 2021- 22 में प्रदेश भर में सरकार की चहेती कंपनी गोग्रीन को गोदामों में भंडारित धान एव गेहूं के रख – रखाव की जिम्मेदारी दी गई थी और उस कम्पनी की लापरवाही के चलते पूरे प्रदेश में एक करोड़ अस्सी लाख क्विंटल गेहूं सड़ गया और प्रदेश सरकार ने उसको बिना कार्रवाई के ऐसे ही जाने दिया, ठीक उसी तरह उमरिया जिले में भी ओपन कैप चंदिया में डेढ़ करोड़ की धान सड़ गई और न ही किसी पर जिम्मेदारी तय की गई और न ही किसी तरह की कोई कार्रवाई की जा रही है या फिर शासन प्रशासन इंसान और मवेशियों की मौत का इंतजार कर रहा है। इतना ही नहीं तीन साल से चल रही इस लापरवाही ने वेयरहाउस प्रबंधन एवं नागरिक आपूर्ति निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है।
